Parvat Parikrama: गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा हमेशा श्रद्धा और भक्ति भाव से करनी चाहिए। इस दौरान मन में भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करना और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना शुभ माना जाता है।
Govardhan Parikrama Benefits: गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत को समर्पित है। दिवाली के अगले दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार पर भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि, शांति और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा के गोवर्धन पहुंचकर परिक्रमा करते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र देव की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया था। इससे नाराज होकर इंद्र देव ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी थी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों और गायों की रक्षा की थी। इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।
परिक्रमा से मिलते हैं ये शुभ फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पर्वत की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इससे परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। गोवर्धन परिक्रमा को भक्ति और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। श्रद्धालु नंगे पैर परिक्रमा करके भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई परिक्रमा से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है।
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मिलता है प्रकृति संरक्षण का संदेश
गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी छिपा है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से लोगों को समझाया था कि पर्वत, पेड़-पौधे, जल और पशु-पक्षी हमारे जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। गोवर्धन पर्वत को प्रकृति और पर्यावरण का प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा और परिक्रमा करने से लोगों को प्रकृति की रक्षा करने तथा जीव-जंतुओं के प्रति दया और प्रेम रखने की प्रेरणा मिलती है।
कितनी लंबी होती है परिक्रमा?
मथुरा स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की मानी जाती है। इसमें बड़ी और छोटी परिक्रमा का धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा, राधाकुंड और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं।
किन बातों का रखें ध्यान?
गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा हमेशा श्रद्धा और भक्ति भाव से करनी चाहिए। इस दौरान मन में भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करना और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना शुभ माना जाता है। परिक्रमा के मार्ग पर गंदगी नहीं फैलानी चाहिए और वहां मौजूद गायों तथा अन्य जीवों को परेशान नहीं करना चाहिए। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही परिक्रमा करनी चाहिए। इस तरह गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा आस्था, भक्ति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और गोवर्धन परिक्रमा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।