Raksha Bandhan: राखी उतारते समय इसे सीधे कूड़ेदान में फेंकने की बजाय सम्मानपूर्वक अलग रखना चाहिए। कई लोग उतारी हुई राखी को पूजा स्थल पर कुछ समय के लिए रख देते हैं।
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर राखी को कितने दिनों तक बांधे रखना चाहिए। क्या अगले दिन राखी उतारी जा सकती है या फिर इसे कुछ दिनों तक कलाई पर रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में राखी को रक्षा सूत्र माना गया है, इसलिए इसे उतारने को लेकर भी कई परंपराएं प्रचलित हैं। कहीं तीन दिन बाद राखी उतारने की मान्यता है तो कहीं जन्माष्टमी तक इसे कलाई पर बांधे रखने की परंपरा है। आखिर राखी कब उतारना शुभ माना जाता है और इसे उतारने का सही तरीका क्या है। आइए जानते हैं।
तुरंत न उतारें राखी
रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर बांधी गई राखी को उसी दिन या तुरंत अगले दिन उतारना आमतौर पर शुभ नहीं माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में राखी को रक्षा सूत्र माना जाता है और इसी वजह से इसे कुछ समय तक कलाई पर बांधे रखने की मान्यता है। हालांकि, राखी कितने दिनों तक पहननी चाहिए, इसे लेकर सभी जगह एक जैसी मान्यता नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसके अलग नियम देखने को मिलते हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार राखी उतारना उचित माना जाता है।
तीन दिन बाद उतारने की मान्यता
राखी उतारने को लेकर एक प्रचलित मान्यता तीन दिनों से जुड़ी है। इसके अनुसार रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के बाद कम से कम तीन दिन तक इसे कलाई पर बांधे रखना चाहिए। तीन दिन पूरे होने के बाद राखी उतारी जा सकती है। इस मान्यता को मानने वाले लोग राखी उतारने के लिए पूजा-पाठ के बाद का समय चुनते हैं। राखी को उतारते समय भी इसे सम्मान के साथ रखने की परंपरा है।
जन्माष्टमी तक रख सकते हैं राखी
कई परिवारों में भाई की कलाई पर बंधी राखी को जन्माष्टमी तक रखने की परंपरा भी है। इस मान्यता के अनुसार राखी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव तक कलाई पर बांधे रखा जाता है और जन्माष्टमी के दिन या उसके बाद इसे उतारा जाता है। रक्षाबंधन के कुछ दिनों बाद जन्माष्टमी का पर्व आता है, इसलिए इस परंपरा में राखी अपेक्षाकृत लंबे समय तक कलाई पर रहती है। अगर आपके परिवार में भी जन्माष्टमी तक राखी रखने की परंपरा है, तो उसी के अनुसार इसे उतारा जा सकता है।
15 या 16 दिन की भी मान्यता
कुछ धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में राखी को 15 या 16 दिनों तक कलाई पर रखने की बात कही जाती है। इस परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन के बाद निश्चित अवधि पूरी होने पर राखी उतारी जाती है। हालांकि, यह नियम हर परिवार या हर क्षेत्र में प्रचलित नहीं है। इसलिए इसे भी एक स्थानीय या पारिवारिक परंपरा के तौर पर ही देखा जाता है।
राखी टूट जाए तो क्या करें
कई बार काम करते समय या कपड़े बदलते समय राखी अपने आप टूट जाती है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं मानी जाती है। राखी को जानबूझकर तोड़कर या काटकर फेंकने के बजाय उसे सम्मान के साथ अलग करना बेहतर माना जाता है। अगर राखी अपने आप टूट गई है, तो उसे किसी साफ स्थान पर रखकर बाद में धार्मिक परंपरा के अनुसार विसर्जित किया जा सकता है। कुछ परिवारों में पुरानी राखी को किसी पेड़ के नीचे रखने या बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा भी है।
राखी उतारते समय रखें ध्यान
राखी उतारते समय इसे सीधे कूड़ेदान में फेंकने की बजाय सम्मानपूर्वक अलग रखना चाहिए। कई लोग उतारी हुई राखी को पूजा स्थल पर कुछ समय के लिए रख देते हैं। इसके बाद परिवार में चली आ रही परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन किया जाता है। राखी उतारने के लिए कोई एक सार्वभौमिक दिन निर्धारित नहीं है। तीन दिन बाद, जन्माष्टमी के दिन या 15 से 16 दिन बाद राखी उतारने की अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं।
2026 में कब है रक्षाबंधन
साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। ऐसे में 28 अगस्त को भाई की कलाई पर बांधी गई राखी को परिवार की परंपरा के अनुसार कुछ दिनों तक रखा जा सकता है।
किस दिन उतारें राखी
राखी उतारने के लिए सबसे जरूरी बात अपने परिवार की परंपरा को ध्यान में रखना है। अगर घर में तीन दिन बाद राखी उतारने की परंपरा है, तो तीन दिन बाद इसे उतारा जा सकता है। अगर जन्माष्टमी तक राखी रखने की परंपरा है, तो जन्माष्टमी के दिन या उसके बाद इसे उतार सकते हैं। यानी राखी उतारने के लिए तीन दिन, जन्माष्टमी और 15 से 16 दिन जैसी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।,इसलिए अपने घर और क्षेत्र में चली आ रही परंपरा के अनुसार राखी उतारना ही उचित माना जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)