Raksha Bandhan: राखी बांधने की शुरुआत भाई को तिलक लगाने से की जाती है। इसके लिए रोली या कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है। तिलक लगाने के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाए जाते हैं।
Raksha Bandhan: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अपनापन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कामना करती है। राखी बांधने की यह परंपरा देखने में भले ही आसान लगती हो, लेकिन हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। पूजा की थाली सजाने से लेकर तिलक लगाने, राखी बांधने और आरती करने तक हर चरण का अपना महत्व बताया गया है। क्या आपको पता है कि राखी बांधते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए? आइए जानते हैं भाई को राखी बांधने का सही तरीका।
राखी की थाली में रखें ये चीजें
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जाती है। इसमें राखी के साथ रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक, मिठाई और पूजा के लिए अन्य सामग्री रखी जा सकती है। कई घरों में थाली में फूल और जल भी रखा जाता है। मान्यता है कि पूजा की सभी सामग्री को एक साथ व्यवस्थित तरीके से रखने से राखी बांधने की विधि सहज और शुभ तरीके से पूरी होती है। बहन को कोशिश करनी चाहिए कि राखी बांधने से पहले थाली पूरी तरह तैयार कर ली जाए, ताकि पूजा के बीच में किसी चीज के लिए उठना न पड़े।
सबसे पहले भाई को लगाएं तिलक
राखी बांधने की शुरुआत भाई को तिलक लगाने से की जाती है। इसके लिए रोली या कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है। तिलक लगाने के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में तिलक को शुभता और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। वहीं अक्षत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर तिलक और अक्षत लगाने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है।
इसके बाद बांधें राखी
तिलक लगाने के बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधते समय बहन भाई की कलाई पर राखी को ठीक तरह से बांधे और यह ध्यान रखे कि वह बहुत ज्यादा ढीली या बहुत ज्यादा कसकर न बंधे। धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र के रूप में बांधी जाती है। इस दौरान बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती है।
राखी बांधते समय न करें ये गलती
राखी बांधते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। सबसे पहली बात यह है कि राखी बांधने की प्रक्रिया जल्दबाजी में न करें। पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें और शांत मन से विधि पूरी करें। कई जगह यह मान्यता भी है कि राखी बांधते समय भाई को खाली कलाई नहीं रखनी चाहिए। पहले तिलक और फिर राखी बांधने की परंपरा निभाई जाती है। साथ ही राखी बांधने के बाद उसे तुरंत उतारना भी उचित नहीं माना जाता।
भाई की आरती जरूर करें
राखी बांधने के बाद भाई की आरती की जाती है। इसके लिए पूजा की थाली में जलाए गए दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। बहन भाई की आरती उतारकर उसके सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करती है। आरती के दौरान भाई के सामने दीपक को श्रद्धा के साथ घुमाया जाता है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा करने का संकल्प लेता है। हालांकि उपहार से ज्यादा इस रस्म में भाई-बहन के रिश्ते और आपसी स्नेह को महत्व दिया जाता है।
राखी के बाद खिलाएं मिठाई
आरती पूरी होने के बाद भाई को मिठाई खिलाने की परंपरा है। बहन अपने हाथों से भाई को मिठाई खिलाती है और भाई भी बहन को मिठाई खिलाता है। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को उपहार देते हैं। इस तरह तिलक, अक्षत, राखी, आरती और मिठाई के साथ रक्षाबंधन की पूजा की विधि पूरी होती है। परिवार में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी इस दिन की परंपराओं में शामिल है।
भद्रा काल का रखें ध्यान
रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भद्रा काल का ध्यान रखने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसलिए राखी बांधने से पहले उस वर्ष की तिथि और शुभ मुहूर्त जरूर देख लेना चाहिए। रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म तक सीमित नहीं है। तिलक से लेकर आरती और मिठाई खिलाने तक हर चरण भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास को दर्शाता है। इसलिए इस दिन राखी बांधते समय जल्दबाजी करने के बजाय पूरी श्रद्धा और पारंपरिक विधि के साथ त्योहार मनाना बेहतर माना जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)