Raksha Bandhan 2026: धार्मिक मान्यताओं में काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा, बाधाओं और अशुभ प्रभावों से जोड़ा गया है। यही कारण है कि पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में इस रंग का इस्तेमाल आमतौर पर कम किया जाता है।
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख-समृद्धि व लंबी उम्र की कामना करती है। बाजार में आजकल कई रंगों और डिजाइनों की राखियां मिलती हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में राखी के रंग को भी खास महत्व दिया गया है। यही वजह है कि कुछ लोग रक्षाबंधन पर काली राखी बांधने से बचते हैं। आखिर काले रंग की राखी को लेकर ऐसी मान्यता क्यों है? क्या सच में इसे अशुभ माना जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता...
काले रंग को लेकर क्या है मान्यता
हिंदू धर्म में अलग-अलग रंगों का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया गया है। जहां लाल, पीला, केसरिया और सफेद जैसे रंगों को शुभ कार्यों से जोड़ा जाता है, वहीं काले रंग को कई धार्मिक अवसरों पर नकारात्मकता और अशुभता से जोड़कर देखा जाता है। इसी मान्यता के कारण रक्षाबंधन जैसे शुभ पर्व पर भी काले रंग की राखी बांधने से कुछ लोग परहेज करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला रक्षासूत्र सकारात्मक ऊर्जा और मंगलकामना का प्रतीक होता है। इसलिए इसके लिए शुभ माने जाने वाले रंगों का इस्तेमाल करने की परंपरा रही है।
क्यों अशुभ माना जाता है काला रंग
धार्मिक मान्यताओं में काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा, बाधाओं और अशुभ प्रभावों से जोड़ा गया है। यही कारण है कि पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में इस रंग का इस्तेमाल आमतौर पर कम किया जाता है। रक्षाबंधन पर राखी केवल एक धागा नहीं होती, बल्कि इसे भाई की रक्षा और मंगलकामना के संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में मान्यता है कि इस दिन काले रंग की राखी बांधने के बजाय लाल, पीली, केसरिया या अन्य शुभ रंगों की राखी बांधना बेहतर माना जाता है। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है।
राखी के रंग का क्या है महत्व
रक्षाबंधन पर राखी के रंग को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। लाल रंग को प्रेम, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। पीला रंग शुभता और समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। केसरिया रंग त्याग, आस्था और धार्मिक भावना का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से इन रंगों की राखियां रक्षाबंधन के लिए अधिक पसंद की जाती हैं। धार्मिक रूप से माना जाता है कि भाई की कलाई पर शुभ रंग का रक्षासूत्र बांधने से सकारात्मक भावनाओं के साथ त्योहार की परंपरा पूरी होती है।
क्या काली राखी बिल्कुल नहीं बांधनी चाहिए
काली राखी को लेकर ऐसी मान्यता जरूर है कि इसे रक्षाबंधन जैसे शुभ अवसर पर नहीं बांधना चाहिए, लेकिन सभी हिंदू परंपराओं में इसे लेकर एक जैसा नियम नहीं है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। कुछ जगहों पर काले धागे का इस्तेमाल बुरी नजर से बचाने के लिए भी किया जाता है, इसलिए काले रंग को हर स्थिति में अशुभ मानना सही नहीं होगा। रक्षाबंधन पर काली राखी न बांधने की परंपरा मुख्य रूप से शुभ-अशुभ रंगों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
राखी कैसी होनी चाहिए
धार्मिक परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन पर ऐसी राखी चुनना शुभ माना जाता है जिसमें लाल, पीला, केसरिया या सफेद जैसे रंग हों। कई लोग मौली या कलावे से बनी राखी को भी शुभ मानते हैं। राखी चुनते समय उसका रंग ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भावना भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसके पीछे भाई की रक्षा, सुख और समृद्धि की कामना का भाव होता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)