Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर जब बहन भाई को तिलक लगाती है तो उस समय भाई के सिर को ढका हुआ रखना शुभ माना जाता है। रुमाल इसी भाव का एक साधारण रूप माना जाता है।
Raksha Bandhan: रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती है। राखी बांधने से पहले तिलक लगाने, आरती करने और मिठाई खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। आपने भी कई घरों में देखा होगा कि बहन जब भाई के माथे पर तिलक लगाती है तो उसके सिर या माथे के पास एक रुमाल रख दिया जाता है। आखिर तिलक लगाते समय भाई के माथे पर रुमाल रखने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता जुड़ी है? आइए जानते हैं।
तिलक के समय रखा जाता है रुमाल
रक्षाबंधन पर तिलक लगाना भाई के सम्मान और मंगल कामना से जुड़ी रस्म मानी जाती है। कई परिवारों में तिलक लगाते समय भाई के सिर या माथे के ऊपर रुमाल रखने की परंपरा देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं में तिलक को शुभता, विजय और मंगल का प्रतीक माना गया है। ऐसे में तिलक लगाते समय रुमाल रखने को भी पूजा की मर्यादा और शुभ संस्कार से जोड़कर देखा जाता है।
रुमाल रखने की क्या मान्यता है?
लोकमान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन पर जब बहन भाई को तिलक लगाती है तो उस समय भाई के सिर को ढका हुआ रखना शुभ माना जाता है। रुमाल इसी भाव का एक साधारण रूप माना जाता है। इसका उद्देश्य भाई के सिर को ढकना और तिलक की रस्म को विधि-विधान के साथ पूरा करना माना जाता है। कुछ मान्यताओं में सिर को ढकना सम्मान और शालीनता का प्रतीक भी माना गया है। जिस तरह पूजा-पाठ के दौरान कई लोग सिर पर कपड़ा रखते हैं, उसी तरह भाई के तिलक के समय रुमाल रखने की परंपरा भी कुछ परिवारों में निभाई जाती है।
तिलक और रुमाल का संबंध
हिंदू धार्मिक परंपराओं में माथे को विशेष महत्व दिया गया है। माथे के बीच में तिलक लगाया जाता है, जिसे आज्ञा चक्र का स्थान भी माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में तिलक को सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकल्प से जोड़ा जाता है। रक्षाबंधन पर बहन जब भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाती है, तो उसके साथ भाई के मंगल और दीर्घायु की कामना की जाती है। इस दौरान रुमाल रखना उस पूरी रस्म को पारंपरिक तरीके से करने का हिस्सा माना जाता है।
क्या रुमाल रखना जरूरी है?
रक्षाबंधन की पूजा में भाई के माथे पर रुमाल रखना कोई ऐसा अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है, जिसे हर व्यक्ति को करना ही चाहिए। यह मुख्य रूप से पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यता से जुड़ी रस्म है। कई परिवारों में भाई के सिर पर रुमाल या कपड़ा रखा जाता है, जबकि कई जगह बिना रुमाल के ही तिलक और राखी की रस्म पूरी की जाती है। इसलिए अगर किसी घर में यह परंपरा नहीं निभाई जाती है तो इसे अशुभ नहीं माना जाना चाहिए।
सिर ढकने की परंपरा
हिंदू धर्म में कई शुभ कार्यों के दौरान सिर ढकने की परंपरा मिलती है। पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में सिर पर कपड़ा रखना सम्मान और मर्यादा से जोड़ा जाता है। इसी परंपरा का एक रूप रक्षाबंधन के तिलक समारोह में भी देखने को मिलता है। भाई के माथे पर तिलक लगाते समय रुमाल रखने को इसी धार्मिक मर्यादा से जोड़कर देखा जाता है। इसमें भाई के प्रति सम्मान और उसके मंगल की कामना का भाव प्रमुख माना जाता है।
रक्षाबंधन पर तिलक का महत्व
रक्षाबंधन पर भाई को तिलक लगाने के पीछे बहन की मंगल कामना का भाव माना जाता है। रोली या कुमकुम से लगाया गया तिलक शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद भाई की आरती उतारकर उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधते समय बहन भाई की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और उसके सुखी जीवन का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। इसी वजह से तिलक, आरती और राखी बांधने की रस्म को रक्षाबंधन के प्रमुख संस्कारों में शामिल किया जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)