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Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कैसे करें? जानें विधि और मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Narak Chaturdashi: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें। इसके लिए श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, रोली, अक्षत, चंदन, फूल, तुलसी दल, धूप, दीपक, घी, फल और मिठाई रख लें।

Narak Chaturdashi
Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी का पर्व दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसी वजह से नरक चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण की वीरता और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त विशेष रूप से श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा किस तरह करनी चाहिए और इस दिन उनकी पूजा का क्या महत्व है? आइए जानते हैं पूजा की विधि और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता।

नरक चतुर्दशी पर श्रीकृष्ण पूजा का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर लोगों को परेशान करता था। उसने देवताओं और मनुष्यों के साथ अत्याचार किए तथा 16 हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था। उसके आतंक से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध किया और नरकासुर का वध करके बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। मान्यता है कि इसी विजय की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से नकारात्मकता दूर होने और जीवन में सुख-शांति आने की कामना की जाती है।

पूजा सामग्री

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें। इसके लिए श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, रोली, अक्षत, चंदन, फूल, तुलसी दल, धूप, दीपक, घी, फल और मिठाई रख लें। इसके अलावा पूजा के लिए स्वच्छ जल और पंचामृत भी तैयार कर सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को पीला रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में पीले फूल और पीले वस्त्रों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।

श्रीकृष्ण की पूजा विधि

नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इस दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें। इसके बाद उन्हें रोली, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल चढ़ाएं और फल-मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर भगवान की आरती करें। पूजा के दौरान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें और उनसे परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

इस मंत्र का करें जाप

नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते समय उनके मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा 'कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥' मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान के नाम का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शाम को जलाएं दीपक

नरक चतुर्दशी पर सुबह भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ शाम के समय दीपदान का भी विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के मुख्य द्वार और आसपास दीपक जलाने चाहिए। कई घरों में यमराज के निमित्त भी दीपदान किया जाता है। इसके पीछे अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की रक्षा की कामना जुड़ी हुई है। शाम को दीपक जलाते समय भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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