facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  festivals›  chhoti diwali ki raat ghar ke bahar deepak jalane ka kya hai mahatva janiye iska rahasya

Chhoti Diwali: छोटी दिवाली की रात क्यों जलाते हैं घर के बाहर दीपक? जानिए इसका धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Chhoti Diwali: छोटी दिवाली की रात घर के बाहर दीपक जलाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि घर के मुख्य द्वार पर दीपक रखने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और घर में शुभता का प्रवेश होता है। 

Chhoti Diwali
Chhoti Diwali: दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन घरों की साफ-सफाई और सजावट के साथ दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। खासतौर पर शाम के समय घर के मुख्य द्वार और बाहर दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि छोटी दिवाली की रात दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छोटी दिवाली पर घर के बाहर दीपक क्यों जलाया जाता है और इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं? आइए जानते हैं।

छोटी दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन दीपक जलाने की परंपरा काफी पुरानी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली की शाम घर के बाहर दीपक जलाने से आसपास का वातावरण शुभ होता है। लोग अपने घर के मुख्य द्वार, आंगन और अन्य स्थानों पर दीपक रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि दीपक का प्रकाश अंधकार को दूर करने के साथ जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है।

घर के बाहर दीपक जलाने का महत्व

छोटी दिवाली की रात घर के बाहर दीपक जलाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि घर के मुख्य द्वार पर दीपक रखने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और घर में शुभता का प्रवेश होता है। दीपक की रोशनी को मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जिस घर में साफ-सफाई और रोशनी होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही वजह है कि छोटी दिवाली की शाम लोग घर के बाहर दीपक जलाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

यमराज के लिए जलाया जाता है दीपक

छोटी दिवाली पर दीपदान की एक विशेष परंपरा यमराज से भी जुड़ी हुई है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। ऐसी मान्यता है कि छोटी दिवाली पर यमराज के लिए दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन कई घरों में आटे या मिट्टी का दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल और रुई की बाती लगाई जाती है।

नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक है दीपक

धार्मिक मान्यताओं में दीपक को अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना गया है। छोटी दिवाली पर घर के बाहर दीपक जलाने का उद्देश्य भी इसी भावना से जुड़ा है। माना जाता है कि दीपक का प्रकाश घर और आसपास के वातावरण से नकारात्मकता को दूर करता है। इस दिन लोग अपने घर के कोनों और मुख्य द्वार पर दीपक जलाते हैं, ताकि पूरा घर रोशनी से जगमगा उठे।

छोटी दिवाली पर कहां-कहां जलाने चाहिए दीपक?

छोटी दिवाली की शाम घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाने की परंपरा है। इसके अलावा आंगन, तुलसी के पास और घर के मंदिर में भी दीपक जलाए जाते हैं। कुछ परिवारों में घर के बाहर दक्षिण दिशा में यम दीपक रखने की परंपरा निभाई जाती है। दीपक जलाते समय उसकी लौ को हवा से सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।

यह भी पढ़ें-

Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? जानें भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा 

Narak Chaturdashi 2026: कब है नरक चतुर्दशी? जानें छोटी दिवाली की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व 

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक? जानें इसका महत्व और परंपरा 
 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel