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Krishna Janmashtami: कृष्ण जन्माष्टमी पर कौन से मंत्र का जाप करना है शुभ? जानें धार्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Janmashtami Puja: कृष्ण जन्माष्टमी के दिन “ॐ कृष्णाय नमः”, “ॐ देवकीनन्दनाय नमः” और हरे कृष्ण महामंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता में मंत्र जाप को भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण व्यक्त करने का माध्यम माना गया है।
 

Janmashtami Mantra
Janmashtami Mantra Jaap: कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा करते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्रों के जाप से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति का ध्यान भगवान की भक्ति में केंद्रित होता है। जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण के नाम और मंत्र का जाप करने से भक्त के मन में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं। भगवान कृष्ण को प्रेम, करुणा, ज्ञान और धर्म का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी आराधना करते समय मन में श्रद्धा और विश्वास रखना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्रीकृष्ण का सबसे सरल मंत्र

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है। “ॐ कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप श्रद्धा के साथ करना शुभ माना जाता है। इस मंत्र का अर्थ है भगवान श्रीकृष्ण को नमन करना। यह छोटा और सरल मंत्र होने के कारण कोई भी व्यक्ति आसानी से इसका जाप कर सकता है। सुबह पूजा के समय या रात में भगवान कृष्ण के जन्म के बाद इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।

हरे कृष्ण महामंत्र का जाप

जन्माष्टमी पर “हरे कृष्ण” महामंत्र का जाप भी विशेष फलदायी माना जाता है। “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे” का जाप भगवान के नाम का स्मरण करने का एक लोकप्रिय तरीका है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान के नाम का स्मरण मन को भक्ति और आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है। इस मंत्र का जाप करते समय व्यक्ति को अपना ध्यान भगवान कृष्ण की लीलाओं और उनके स्वरूप पर केंद्रित करना चाहिए।

गोपाल मंत्र का जाप

भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करने वाले भक्त जन्माष्टमी पर गोपाल मंत्र का जाप भी करते हैं। “ॐ देवकीनन्दनाय नमः” मंत्र भगवान कृष्ण के देवकीनंदन स्वरूप को समर्पित है। इस मंत्र का जाप करते समय भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का ध्यान किया जाता है। माना जाता है कि इससे भक्त के मन में वात्सल्य और प्रेम का भाव जागृत होता है।

मंत्र जाप के समय रखें श्रद्धा और एकाग्रता

मंत्र जाप करते समय केवल मंत्र बोलना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि मन की एकाग्रता और श्रद्धा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। जन्माष्टमी के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद भगवान कृष्ण के सामने दीपक जलाकर मंत्र का जाप किया जा सकता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखने और भगवान के स्वरूप का ध्यान करने से भक्ति का भाव और गहरा होता है।

जन्माष्टमी की रात क्यों है विशेष

जन्माष्टमी की रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण ने मथुरा की कारागार में आधी रात के समय अवतार लिया था। इसलिए इस दिन मध्यरात्रि में विशेष पूजा की जाती है। भक्त भगवान कृष्ण का अभिषेक करते हैं, उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाते हैं तथा माखन-मिश्री सहित विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित करते हैं। इस दौरान कृष्ण मंत्र का जाप करना विशेष शुभ माना जाता है।

भगवान कृष्ण की भक्ति का संदेश

भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कर्म, धर्म और भक्ति का महत्व बताया। उनका संदेश है कि मनुष्य को अपने कर्तव्य का पालन करते हुए फल की चिंता किए बिना कर्म करना चाहिए। जन्माष्टमी केवल भगवान के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि उनके विचारों और शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इस दिन कृष्ण मंत्र का जाप करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंत्र जाप का सबसे बड़ा महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन “ॐ कृष्णाय नमः”, “ॐ देवकीनन्दनाय नमः” और हरे कृष्ण महामंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता में मंत्र जाप को भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण व्यक्त करने का माध्यम माना गया है। हालांकि मंत्र जाप का सबसे बड़ा महत्व व्यक्ति की श्रद्धा, सकारात्मक भावना और एकाग्रता में माना जाता है। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए उनके प्रेम, ज्ञान, धर्म और कर्म के संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना ही इस पर्व की सच्ची भावना है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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