Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं सुनाई जाती हैं। इनमें एक कथा उस राक्षसी पूतना की भी है, जो कंस के कहने पर बाल कृष्ण का वध करने के लिए गोकुल पहुंची थी। पूतना ने अपना रूप बदलकर एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और नंद भवन में जा पहुंची। उसने अपने स्तनों पर विष लगाया हुआ था और बाल कृष्ण को दूध पिलाने के बहाने उनका प्राण लेने का इरादा था, लेकिन जिसे वह एक साधारण बालक समझकर आई थी, वही भगवान श्रीकृष्ण थे। आखिर पूतना कौन थी और कैसे कान्हा ने उसका अंत किया, आइए जानते हैं पूरी पौराणिक कथा...
कंस ने पूतना को क्यों भेजा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब कंस को यह आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा, तब से वह भयभीत रहने लगा था। कंस ने देवकी और वसुदेव के बच्चों को मारने का प्रयास किया, लेकिन श्रीकृष्ण का जन्म होने के बाद वसुदेव उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचा आए।
कंस को जब यह पता चला कि देवकी का आठवां पुत्र जन्म ले चुका है और किसी तरह उसके हाथ से बच गया है, तब उसने उसे खोजने के लिए अपने राक्षसों को भेजना शुरू किया। कंस चाहता था कि गोकुल और आसपास के क्षेत्र में जन्मे सभी नवजात बच्चों का पता लगाकर उनका वध कर दिया जाए। इसी क्रम में कंस ने राक्षसी पूतना को भी बाल कृष्ण का वध करने के लिए भेजा। पूतना को मायावी रूप धारण करने और अपनी शक्ति से लोगों को भ्रमित करने में महारत हासिल थी।
सुंदर स्त्री का रूप धारण कर गोकुल पहुंची पूतना
कथा के अनुसार, पूतना ने अपना भयानक राक्षसी रूप छोड़कर एक अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण किया। उसके रूप को देखकर कोई भी यह नहीं समझ सकता था कि वह एक राक्षसी है। वह सुंदर वस्त्र और आभूषण धारण करके गोकुल पहुंची। गोकुल में प्रवेश करने के बाद वह सीधे नंद बाबा के भवन की ओर बढ़ी। उस समय बाल कृष्ण घर में ही थे। पूतना को देखकर वहां मौजूद लोगों को उसके बारे में किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। उसके दिव्य और सुंदर रूप को देखकर ऐसा लगा मानो कोई देवी स्वयं बालक कृष्ण को देखने आई हो। पौराणिक वर्णन में आता है कि पूतना ने अपने रूप और ममता भरे व्यवहार से सभी को प्रभावित कर दिया। वह धीरे-धीरे उस स्थान तक पहुंच गई जहां बाल कृष्ण थे।
मां यशोदा के सामने ही कृष्ण को गोद में उठाया
पूतना ने बाल कृष्ण को देखा तो उन्हें अपनी गोद में उठाने के लिए आगे बढ़ी। श्रीकृष्ण उस समय छोटे बालक के रूप में थे। पूतना के मन में उनके प्रति ममता नहीं, बल्कि उन्हें मारने का षड्यंत्र था। उसने अपने स्तनों पर घातक विष लगा रखा था। उसकी योजना थी कि वह बाल कृष्ण को दूध पिलाएगी और विष के प्रभाव से उनका अंत हो जाएगा। कथा के अनुसार, पूतना ने बाल कृष्ण को अपनी गोद में लेकर उन्हें स्तनपान कराने का प्रयास किया। उसे विश्वास था कि उसके विष का प्रभाव होते ही बालक की मृत्यु हो जाएगी। लेकिन पूतना यह नहीं जानती थी कि उसकी गोद में स्वयं भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण विराजमान हैं।
कान्हा ने दूध के साथ पूतना के प्राण भी खींच लिए
जब पूतना ने श्रीकृष्ण को अपना दूध पिलाना शुरू किया, तब बाल कृष्ण ने उसका दूध पीना आरंभ किया। लेकिन श्रीकृष्ण ने केवल दूध ही नहीं पिया, बल्कि उसके शरीर में स्थित प्राणवायु को भी खींचना शुरू कर दिया। पूतना को अचानक असहनीय पीड़ा होने लगी। वह बाल कृष्ण को अपने से अलग करने का प्रयास करने लगी, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसकी छाती को पकड़ लिया और स्तनपान करते हुए उसके प्राण खींचते रहे। पूतना अपने वास्तविक रूप में आने लगी। उसका सुंदर स्त्री का रूप समाप्त हो गया और वह अपने विशाल राक्षसी रूप में प्रकट हो गई।
पूतना की भयंकर चीख से कांप उठा गोकुल
जैसे-जैसे श्रीकृष्ण उसके प्राण खींचते गए, पूतना की पीड़ा बढ़ती गई। वह बाल कृष्ण को अपने से अलग करने के लिए पूरी शक्ति लगाने लगी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। अंत में पूतना ने एक भयंकर चीख मारी। उसकी आवाज इतनी तेज थी कि गोकुल में लोग भयभीत होकर अपने घरों से बाहर निकल आए। इसके बाद पूतना का विशाल शरीर धरती पर गिर पड़ा। कथा के अनुसार, जब पूतना का वास्तविक रूप सामने आया तो उसका शरीर अत्यंत विशाल था। उसके गिरने से आसपास की भूमि तक हिल गई। गोकुलवासियों ने जब यह दृश्य देखा तो वे हैरान रह गए।
पूतना के गिरने के बाद जब गोकुलवासियों ने वहां पहुंचकर देखा तो बाल कृष्ण उसके शरीर के ऊपर सुरक्षित अवस्था में थे। माता यशोदा सहित सभी लोग तुरंत श्रीकृष्ण को अपने पास ले आए। कथा के अनुसार, यशोदा मैया ने अपने लाल को गोद में लिया और उनकी रक्षा के लिए कई धार्मिक विधियां कीं। गोकुल की स्त्रियों ने भी बाल कृष्ण की नजर उतारी और भगवान से उनके सुरक्षित रहने की प्रार्थना की।
श्रीकृष्ण के स्पर्श से पूतना को मिला मोक्ष
भागवत पुराण में पूतना प्रसंग का विशेष वर्णन मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना का वध तो किया, लेकिन उसके साथ एक विशेष कृपा भी की। पूतना बालक श्रीकृष्ण को मारने के उद्देश्य से आई थी, फिर भी उसने उन्हें अपनी गोद में लिया और स्तनपान कराया। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान ने उसके इस मातृभाव के बाहरी रूप को स्वीकार किया और उसे मोक्ष प्रदान किया। पूतना के शरीर से निकली दुर्गंध के स्थान पर सुगंध फैलने लगी। उसके शरीर का अंतिम संस्कार किए जाने पर भी गोकुलवासियों को आश्चर्यजनक सुगंध प्राप्त हुई। इस प्रकार जिस पूतना ने श्रीकृष्ण को विष पिलाकर मारने का प्रयास किया था, उसी का अंत बाल कृष्ण के हाथों हुआ। कंस द्वारा भेजी गई पूतना गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण को मारने आई थी, लेकिन स्वयं उनके हाथों मारी गई।
पूतना वध के बाद भी कंस ने नहीं छोड़ा श्रीकृष्ण का पीछा
पूतना के वध की खबर जब कंस तक पहुंची तो उसे यह एहसास होने लगा कि गोकुल में रहने वाला यह बालक कोई साधारण बालक नहीं है। इसके बावजूद कंस ने श्रीकृष्ण का पीछा करना नहीं छोड़ा। वह लगातार अपने राक्षसों को गोकुल भेजता रहा। बाल कृष्ण ने आगे चलकर कंस के भेजे अनेक राक्षसों का वध किया। जन्माष्टमी के अवसर पर पूतना वध की यह कथा भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाओं में गिनी जाती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)