Krishna Janmashtami: अभिषेक पूरा होने के बाद एक साफ और मुलायम कपड़े से लड्डू गोपाल को धीरे-धीरे पोंछें। प्रतिमा पर पानी या पंचामृत जमा न रहने दें। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाने के लिए तैयार करें।
Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर घर-घर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के बाद उनका अभिषेक कर नए वस्त्र पहनाते हैं। इसके बाद मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और फूलों से लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है। माखन-मिश्री, पंचामृत, पंजीरी और तरह-तरह के सात्विक पकवानों का भोग लगाया जाता है। कई घरों में इस दिन भगवान कृष्ण को छप्पन भोग भी अर्पित किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्माष्टमी की रात लड्डू गोपाल का अभिषेक किस क्रम से करना चाहिए, पंचामृत में कौन-कौन सी चीजें मिलानी चाहिए, कान्हा को कौन से फूल और भोग प्रिय माने जाते हैं और छप्पन भोग में किन चीजों को शामिल किया जाता है? आइए जानते हैं जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा से जुड़ी पूरी विधि और जरूरी जानकारी...
पूजा स्थल की साफ-सफाई करें
सबसे पहले घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। जिस स्थान पर लड्डू गोपाल की पूजा करनी है, वहां गंगाजल या स्वच्छ जल का छिड़काव कर सकते हैं। इसके बाद एक साफ चौकी रखें और उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी को फूलों से सजाएं और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को वहां विराजमान करें। पूजा के लिए शंख, घंटी, दीपक, धूप, कपूर, चंदन, रोली, अक्षत, फूल, तुलसी दल, पंचामृत की सामग्री, नए वस्त्र, आभूषण, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और भोग की सामग्री पहले से तैयार रखें।
दीपक जलाकर पूजा का शुभारंभ करें
पूजा शुरू करने से पहले भगवान के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद धूप या अगरबत्ती अर्पित करें। गणेश जी का ध्यान करके पूजा की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और मन में संकल्प लें कि आप श्रद्धा और भक्ति के साथ जन्माष्टमी की पूजा कर रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान और संकल्प करें
हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें। अपने मन में अपनी मनोकामना रखते हुए जन्माष्टमी व्रत और पूजा का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद हाथ में लिए हुए जल और अक्षत को पूजा स्थल पर छोड़ दें।
लड्डू गोपाल का जल से अभिषेक करें
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय मानकर सबसे पहले लड्डू गोपाल को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। यदि प्रतिमा छोटी है तो बहुत अधिक पानी डालने के बजाय चम्मच या छोटी धार से अभिषेक करें। जल अर्पित करते समय भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और कृष्ण मंत्र या नाम का जाप करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और मिश्री से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें।
पंचामृत से अभिषेक करें
पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और मिश्री का इस्तेमाल किया जाता है। इन पांचों पदार्थों को एक स्वच्छ पात्र में मिलाकर लड्डू गोपाल को स्नान कराया जाता है। अभिषेक करते समय भगवान का नाम लेते रहें। पंचामृत अभिषेक के बाद दोबारा स्वच्छ जल से भगवान को स्नान कराएं, ताकि अभिषेक में इस्तेमाल किए गए पदार्थ प्रतिमा से पूरी तरह साफ हो जाएं। अंत में चाहें तो गंगाजल मिले स्वच्छ जल से भी स्नान करा सकते हैं।
लड्डू गोपाल को साफ कपड़े से पोंछें
अभिषेक पूरा होने के बाद एक साफ और मुलायम कपड़े से लड्डू गोपाल को धीरे-धीरे पोंछें। प्रतिमा पर पानी या पंचामृत जमा न रहने दें। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाने के लिए तैयार करें।
भगवान को नए पीले वस्त्र पहनाएं
जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। पीले या पीत रंग के वस्त्र भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप से विशेष रूप से जुड़े माने जाते हैं। इसलिए लड्डू गोपाल को पीली धोती या सुंदर पीले वस्त्र पहनाए जा सकते हैं। इसके बाद भगवान को कंठी, हार, बाजूबंद, कड़े, पायल और अन्य उपलब्ध आभूषण पहनाएं।
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मुकुट, मोरपंख और बांसुरी से श्रृंगार करें
वस्त्र पहनाने के बाद भगवान के सिर पर सुंदर मुकुट सजाएं। मुकुट में मोरपंख लगाया जा सकता है। भगवान कृष्ण के स्वरूप में मोरपंख और बांसुरी का विशेष महत्व माना जाता है। इसके बाद बांसुरी को भगवान के हाथ में रखें या उनके पास सजाएं। माथे पर चंदन या वैष्णव परंपरा के अनुसार तिलक लगाएं। इसके बाद भगवान को फूलों की माला पहनाएं।
तुलसी दल और पुष्प अर्पित करें
भगवान श्रीकृष्ण को ताजे और स्वच्छ फूल अर्पित करें। कमल, कदंब, मालती, चमेली आदि पुष्प उपलब्ध हों तो चढ़ाए जा सकते हैं। भगवान को तुलसी दल अर्पित करना भी विशेष माना जाता है। भोग की प्रत्येक प्रमुख थाली या भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद पर तुलसी दल रखा जा सकता है। तुलसी दल अर्पित करते समय भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान करें
जन्माष्टमी पर भगवान के जन्म के बाद उन्हें सुंदर झूले या पालने में विराजमान कराने की परंपरा है। झूले को फूलों, मोरपंख और रंगीन कपड़ों से सजाया जा सकता है। लड्डू गोपाल को झूले में बैठाकर भक्त धीरे-धीरे पालना झुलाते हैं और कृष्ण जन्म के भजन गाते हैं। इस दौरान घर में भगवान के जन्म की खुशी का वातावरण बनाया जाता है।
माखन-मिश्री का भोग लगाएं
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को माखन-मिश्री का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसके लिए ताजा माखन लेकर उसमें मिश्री मिलाएं और भगवान के सामने स्वच्छ पात्र में रखें। ऊपर से तुलसी दल अर्पित किया जा सकता है। माखन-मिश्री के अलावा दूध, दही, खीर, पंजीरी, पेड़ा, लड्डू, फल, मेवे और अन्य सात्विक खाद्य पदार्थ भी भोग में रखे जा सकते हैं।
भगवान को भोग अर्पित करें
भोग की थाली भगवान के सामने रखने के बाद कुछ समय के लिए शांत वातावरण में भगवान का ध्यान करें। भोग अर्पित करते समय भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करें कि वह भोग स्वीकार करें। भोग भगवान को अर्पित करने से पहले भोजन को चखने से बचना चाहिए। भोग के लिए इस्तेमाल किए गए बर्तन और भोजन दोनों स्वच्छ होने चाहिए।
कृष्ण मंत्र और भजन का जाप करें
भोग के दौरान या उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जाप किया जा सकता है। भक्त “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे” जैसे महामंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा श्रीकृष्ण के भजन और जन्मोत्सव के गीत भी गाए जा सकते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें
भोग लगाने के बाद भगवान की आरती करें। दीपक और कपूर से आरती उतारी जा सकती है। आरती के दौरान घंटी बजाएं और परिवार के सभी सदस्य भगवान का ध्यान करें। आरती के बाद भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करें और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें।
कृष्ण जन्म का उत्सव मनाएं
आरती के बाद लड्डू गोपाल को पालने में धीरे-धीरे झुलाएं। इस दौरान “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे कृष्ण जन्म के भजन गाए जाते हैं। परिवार के सदस्य भगवान के जन्म की खुशी में पुष्प अर्पित कर सकते हैं और जयकारे लगा सकते हैं।
पंचामृत और भोग का प्रसाद बांटें
पूजा पूरी होने के बाद पंचामृत और भगवान को लगाया गया भोग प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जाता है। माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर और अन्य प्रसाद भी सभी को श्रद्धा से दिया जा सकता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)