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Diwali Puja: दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? जानें धार्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Diwali Worship Tradition: दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का मुख्य उद्देश्य जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि की कामना करना है। 
 

Diwali Worship Tradition
Diwali Lakshmi Ganesh Puja: भारत में दिवाली का त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक माना जाता है। दिवाली के दिन घरों को दीपों, रंगोली और फूलों से सजाया जाता है। शाम के समय विशेष रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से इन दोनों देवी-देवताओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन, बुद्धि और खुशहाली आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और महत्व।

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा

हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। दिवाली का दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। उनके प्रकट होने के बाद देवताओं और ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की थी। इसी वजह से कार्तिक अमावस्या को मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व प्राप्त है।

मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, सुंदर तथा प्रकाश से सजे घरों में प्रवेश करती हैं। इसलिए लोग दिवाली से पहले अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। भक्त मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि उनके घर में हमेशा धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहे।

मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों?

दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने के पीछे विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभता के प्रतीक हैं। वहीं मां लक्ष्मी धन और समृद्धि प्रदान करती हैं। जीवन में केवल धन होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस धन का सही उपयोग करने के लिए बुद्धि और विवेक का होना भी जरूरी है।

इसी कारण दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से धन और वैभव मिलता है, जबकि भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति को सही निर्णय लेने की बुद्धि और शक्ति प्राप्त होती है। दोनों की एक साथ पूजा करने का संदेश है कि जीवन में धन के साथ ज्ञान और विवेक भी होना चाहिए।

भगवान गणेश प्रथम पूजनीय

भगवान गणेश को सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के दोनों पुत्रों कार्तिकेय और गणेश के बीच यह प्रतियोगिता हुई कि कौन पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके आएगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर संसार की परिक्रमा करने निकल पड़े, जबकि भगवान गणेश ने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की तीन परिक्रमा की। उन्होंने कहा कि माता-पिता में ही पूरा संसार समाया हुआ है। भगवान गणेश की इस बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूजनीय होने का वरदान मिला। इसी मान्यता के कारण दिवाली की पूजा में भी सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है और फिर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

पूजा से क्या मिलती है सीख?

दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करना केवल धन प्राप्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने का संदेश भी देता है। मां लक्ष्मी समृद्धि का प्रतीक हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धन तभी सार्थक होता है जब उसका उपयोग अच्छे कार्यों, परिवार की खुशहाली और समाज की भलाई के लिए किया जाए। बिना बुद्धि के धन का सही उपयोग करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए दिवाली पर दोनों की पूजा करके भक्त यह कामना करते हैं कि उनके जीवन में धन के साथ सद्बुद्धि और अच्छे विचार भी बने रहें।

दिवाली पर कैसे करें पूजा?

दिवाली के दिन सुबह घर की साफ-सफाई करके पूजा स्थल को अच्छी तरह सजाना चाहिए। शाम के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद दोनों को तिलक लगाएं और फूल, माला, अक्षत, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक या लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं मां लक्ष्मी को कमल का फूल, बताशे और खील खिलौने चढ़ाने की परंपरा है। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। अंत में आरती करके घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का क्या है महत्व?

दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का मुख्य उद्देश्य जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि की कामना करना है। यह पूजा हमें सिखाती है कि धन के साथ ज्ञान, विनम्रता और अच्छे कर्म भी जरूरी हैं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ उनकी आराधना करते हैं। इस तरह दिवाली का यह पावन पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता, सद्भाव और अच्छे विचारों को अपनाने का भी संदेश देता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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