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Rama Ekadashi: रमा एकादशी पर तुलसी पूजा का क्या है महत्व? जानें जरूरी नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Rama Ekadashi: रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी के पौधे के पास जाकर दीपक जलाएं।

Rama Ekadashi: 
Rama Ekadashi: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली रमा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमा एकादशी पर तुलसी की पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं। यही वजह है कि इस दिन तुलसी पूजन और तुलसी दल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रमा एकादशी पर तुलसी की पूजा किस तरह करनी चाहिए और इस दौरान किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है? आइए जानते हैं।

रमा एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी में माता लक्ष्मी का वास होता है और भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक तुलसी पूजन करने से परिवार पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय होने के कारण इस दिन उनकी पूजा में तुलसी दल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

तुलसी पूजा की विधि

रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी के पौधे के पास जाकर दीपक जलाएं। तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें और रोली, अक्षत तथा फूल चढ़ाकर उनकी पूजा करें। इसके बाद तुलसी माता के सामने हाथ जोड़कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। भगवान विष्णु को भोग लगाते समय उसमें तुलसी दल जरूर रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी दल अर्पित करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ना क्यों है वर्जित?

रमा एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी तिथि पर माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे को छूने और उसके पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए। अगर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना चाहते हैं, तो एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को ही पत्ते तोड़कर साफ स्थान पर रख लेने चाहिए। इस दिन पौधे से स्वयं गिरे हुए पत्तों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

तुलसी पूजा के जरूरी नियम

रमा एकादशी पर तुलसी पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस दिन तुलसी के पौधे को छूने, पत्ते तोड़ने और उसमें जल चढ़ाने से परहेज करने की मान्यता है। तुलसी के पास स्वच्छता बनाए रखें और श्रद्धापूर्वक दीपक जलाकर माता तुलसी का स्मरण करें। दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि उसकी लौ पौधे और पत्तियों के बहुत पास न हो। पूजा के दौरान किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें और मन में भगवान विष्णु का ध्यान रखें।

भगवान विष्णु को अर्पित करें तुलसी दल

रमा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है और उन्हें तुलसी दल अर्पित करने से पूजा का विशेष फल मिलता है। इसलिए दशमी तिथि को तोड़े गए तुलसी के पत्तों को भगवान विष्णु के भोग में शामिल कर सकते हैं। पूजा के समय भगवान को फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। आप 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

तुलसी पूजा से जुड़ी मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमा एकादशी पर तुलसी माता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा से आर्थिक परेशानियां दूर होने और परिवार में समृद्धि आने की कामना की जाती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एक साथ कृपा पाने के लिए इस दिन तुलसी पूजन करना शुभ होता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को भगवान विष्णु की पूजा के साथ तुलसी माता का ध्यान भी करना चाहिए।

तुलसी के पास करें मंत्र जाप

रमा एकादशी पर तुलसी के पौधे के पास बैठकर भगवान विष्णु के नामों का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और रमा एकादशी की व्रत कथा सुनना भी लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस तरह श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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