Bhai Dooj : भाई दूज का त्योहार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। रक्षा बंधन की तरह ही, भाई-बहनों के लिए इस त्योहार का बहुत महत्व है।
Bhai Dooj : भाई दूज का त्योहार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। रक्षा बंधन की तरह ही, भाई-बहनों के लिए इस त्योहार का बहुत महत्व है। भाई दूज के दिन, बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैंयह एक ऐसी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। इस दिन, बहनें अपने भाइयों को घर बुलाती हैं और उन्हें भोजन कराती हैं। इसके बाद, वे अपने भाइयों को एक पूरा सूखा नारियल भेंट करती हैं और उनके लिए सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। ऐसा माना जाता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की आयु बढ़ती है। आइए, उन मंत्रों के बारे में जानते हैं जिनका जाप इस दिन तिलक लगाते समय किया जाना चाहिए।
भाई दूज पर करें इन मंत्रों का जाप
यमराज और यमुना के लिए मुख्य मंत्र
यह भाई दूज का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण मंत्र है, जो भाई की लंबी उम्र के आशीर्वाद से जुड़ा है। यह मंत्र भाई-बहन के रिश्ते को गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों की पावनता से जोड़ता है, और साथ ही भाई की उन्नति और सफलता के लिए प्रार्थना भी करता है।
'गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें। ' तिलक लगाने के दौरान मंत्र जाप
तिलक लगाते समय इस सरल मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है, जो भाई के जीवन में शांति और कल्याण लाता है।
ऊं यमाय नम: भाई की उन्नति के लिए मंत्र जाप
भाई की उन्नति और सुख-शांति के लिए इस वैदिक मंत्र का जाप करें।
'ॐ स्वस्ति भद्राणि शुभानि, पूर्णं भवतु ते आयुष्मान्। दीर्घायुः।' भाई को भोजन कराने के दौरान मंत्र जाप
जब बहन भाई को भोजन कराती हैं, तब इस मंत्र का उच्चारण करना भाई को यमराज के भय से मुक्ति दिलाता है।
'भ्रातस्तवानुजाताहं भुंक्ष्व भक्तमिमं शुभं। प्रीतये यमराजस्य यमुनाया विशेषत:।।'
भाई दूज का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमुना जी को अपने भाई यमराज से सम्मान और आतिथ्य के प्रतीक के रूप में एक वरदान प्राप्त हुआ था इसी कारण भाई दूज को 'यम द्वितीया' के नाम से भी जाना जाता है। यमराज द्वारा दिए गए वरदान के अनुसार जो कोई भी इस दिन यमुना नदी में स्नान करता है और यमराज की पूजा करता है उसे मृत्यु के बाद यमलोक नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा सूर्य देव की पुत्री यमुना जी को एक ऐसी देवी के रूप में पूजा जाता है जो सभी कष्टों को दूर करने में सक्षम हैं। इसलिए यम द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करने और यमुना जी तथा यमराज दोनों की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है और हाथ जोड़कर यमराज से अपने भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करती है। पुराणों के अनुसार इस दिन की गई पूजा से यमराज प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)