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Bhagvan Ganesh Ki Sawari : भगवान गणेश का वाहन मूषक ही क्यों है? जानिए अद्भुत कथा

jeevanjaliPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Bhagvan Ganesh Ki Sawari : क्या आपने कभी सोचा है कि समस्त देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश, जिनका विशाल और दिव्य स्वरूप है, उनका वाहन इतना छोटा-सा मूषक ही क्यों है? 

Bhagvan Ganesh Ka Vahan
Bhagvan Ganesh Ka Vahan:  क्या आपने कभी सोचा है कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश जिनका स्वरूप विशाल और दिव्य है, उनका वाहन इतना छोटा मूषक क्यों है? आखिर ऐसा क्या कारण था कि देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले गणपति ने सिंह, हाथी या गरुड़ जैसे शक्तिशाली वाहन की बजाय एक छोटे से मूषक को अपना वाहन बनाया? इसके पीछे केवल एक पौराणिक कथा ही नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश भी छिपा है।

 भगवान गणेश का वाहन मूषक ही क्यों है

पहली कहानी

गणेश पुराण के अनुसार, राजा इंद्र के दरबार में क्रौंच नाम का एक गंधर्व था। एक बार, इंद्र की सभा में क्रौंच अप्सराओं के साथ हंसी-मज़ाक और मौज-मस्ती में व्यस्त था। इंद्र ने यह देखा और गुस्से में आकर उसे चूहा बन जाने का श्राप दे दिया। स्वभाव से शरारती क्रौंच, एक शक्तिशाली चूहे के रूप में सीधे ऋषि पराशर के आश्रम में जा पहुँचा। वहाँ पहुँचते ही उसने भारी उपद्रव मचाया: उसने मिट्टी के सारे बर्तन तोड़ दिए,अनाज खा गया, बगीचा बर्बाद कर दिया और ऋषियों के वस्त्र व धर्मग्रंथ कुतर डाले। परेशान होकर ऋषि पराशर सोचने लगे कि इस चूहे के आतंक से कैसे बचा जाए। अपनी व्यथा में, उन्होंने भगवान गणेश की शरण ली। तब गणेश ने पराशर से कहा कि वे इस चूहे को अपना *वाहन बना लेंगे। गणेश ने अपना तेजस्वी पाश  फेंका वह पाश चूहे का पीछा करते हुए पाताल लोक तक गया, उसकी गर्दन को जकड़ा, उसे खींचकर बाहर लाया और गजानन के सामने पेश किया।



पाश की पकड़ से चूहा बेहोश हो गया। होश में आने पर, उसने गणेश की पूजा की और अपनी जान बख्शने की विनती की। हालाँकि चूहे की प्रार्थनाओं से प्रसन्न होकर भी गणेश ने कहा "तुमने ब्राह्मणों को बहुत कष्ट पहुँचाया है। मैंने दुष्टों का विनाश करने और सज्जनों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए अवतार लिया है फिर भी, शरण में आए लोगों की रक्षा करना भी मेरा परम कर्तव्य है। इसलिए, जो चाहो वह वरदान माँगो। यह सुनकर शरारती चूहे का अहंकार जाग उठा उसने कहा मैं आपसे कुछ नहीं माँगना चाहता; यदि आप चाहें तो मुझसे कोई वरदान माँग सकते हैं  चूहे के अहंकारी शब्द सुनकर गणेश मन ही मन मुस्कुराए और बोले यदि तुम्हारी बात सच है तो मेरी सवारी बन जाओ। जैसे ही चूहा सहमत हुआ गणेश तुरंत उस पर सवार हो गए। विशालकाय गजानन के भारी वज़न के नीचे दबकर चूहे की जान पर बन आई। तब उसने गणेश से प्रार्थना की कि वे अपना वज़न ऐसा कर लें जिसे वह उठा सके। इस तरह गणेश ने चूहे का अहंकार तोड़ा और उसे अपना वाहन बना लिया।

दूसरी कथा 

कथा के अनुसार, गजमुखासुर नाम के एक राक्षस ने अपनी अपार शारीरिक शक्ति से देवताओं को बहुत परेशान किया। देवता एकजुट हुए और मदद के लिए भगवान गणेश के पास गए। भगवान गणेश ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उन्हें गजमुखासुर से मुक्ति दिलाएंगे और फिर राक्षस के साथ भीषण युद्ध किया। कहा जाता है कि इस युद्ध के दौरान गणेशजी का एक दाँत टूट गया। क्रोधित होकर गणेशजी ने उसी टूटे हुए दाँत से गजमुखासुर पर प्रहार किया डरकर राक्षस चूहे के रूप में बदल गया और भागने की कोशिश करने लगा लेकिन गणेशजी ने उसे पकड़ लिया। मौत के डर से राक्षस ने माफ़ी माँगी और गणेशजी ने उसे चूहे के उसी रूप में अपना वाहन स्वीकार कर लिया।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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