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Bhadrpad Purnima : भाद्रपद पूर्णिमा पर दान करना क्यों माना जाता है शुभ, जानिए महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Bhadrpad Purnima:  हिंदू धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भाद्रपद पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा के लिए शुभ माना जाता है।

Bhadrpad Purnima:
Bhadrpad Purnima:  हिंदू धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भाद्रपद पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने, व्रत रखने और अनुष्ठान करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है। भाद्रपद पूर्णिमा से ही पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाती है इसलिए, इस दिन पूर्वजों के नाम पर तर्पण और दान करना बहुत महत्वपूर्ण है। हालाँकि इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिससे यह तय करने में कुछ उलझन हो सकती है कि भाद्रपद पूर्णिमा कब मनाई जाए। आइए जानते हैं

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है?

पूर्णिमा तिथि शुरू: 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) – शाम 06:36 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 सितंबर 2026 (शनिवार) – शाम 05:48 बजे
इसलिए, भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर को मनाई जाएगी।

दान और पवित्र स्नान के लिए शुभ समय

इस दिन अभिजीत मुहूर्त होता है। यह शुभ समय सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहता है। आप इस दौरान पवित्र स्नान और दान-पुण्य के कार्य कर सकते हैं।

भाद्रपूर्णिमा पर इन चीजों का करें दान 

1. अनाज का दान 
हमारे बुजुर्गों का हमेशा से यही मानना रहा है कि भूखे को भोजन कराने से बड़ा कोई पुण्य का काम नहीं है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चावल, गेहूं, दाल, नमक और आटा दान करना बहुत शुभ माना जाता है। आप किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद व्यक्ति को 'सिधा' (बिना पका हुआ राशन) भी दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे घर की रसोई में कभी अनाज की कमी नहीं होती।

2. कपड़े और जूते-चप्पल का दान
इस दिन गरीबों या ज़रूरतमंदों को कपड़े दान करने से बहुत पुण्य मिलता है। कोशिश करें कि कपड़े नए हों, पुराने या फटे हुए न हों। इसके अलावा, जूते या चप्पल दान करने से राहु, केतु और शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं और पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

3. काले तिल और शुद्ध घी
चूंकि यह पूर्णिमा पूर्वजों के आगमन का द्वार मानी जाती है, इसलिए काले तिल का दान करना बहुत असरदार माना जाता है। 'पितृ दोष' से राहत पाने और जीवन की मुश्किलों को दूर करने के लिए काले तिल, शुद्ध गाय का घी और गुड़ दान करना चाहिए।

4. छाता और ज़रूरी बर्तन
पुराने ग्रंथों में कहा गया है कि छाता दान करने से जीवन पर मंडरा रहे संकट के बादल छंट जाते हैं। इसके साथ ही, आप अपनी श्रद्धा के अनुसार तांबे, कांसे या पीतल के बर्तन भी दान कर सकते हैं। हमेशा अपनी खुशी और आर्थिक क्षमता के अनुसार ही दान करें दिखावे के लिए या दबाव में किया गया दान कभी फलदायी नहीं होता। सुबह स्नान के बाद सच्चे मन से जो भी अर्पित किया जाता है, भगवान उसे स्वीकार करते हैं।

भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप  में दिखाई देता है। चंद्र देव की पूजा करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन ज़रूरतमंदों को अनाज, कपड़े, फल, गुड़ और दक्षिणा दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। साथ ही, इस दिन पूर्वजों को याद करने और 'तर्पण' करने से 'पितृ दोष' से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)


 

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