Bada Mangal 3rd 2025: बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल के नाम से भी जाना जाता है। यह उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है। यह पर्व भगवान हनुमान को समर्पित है, जिन्हें भगवान राम का परम भक्त, संकटमोचक और बल, बुद्धि और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। साल 2025 में ज्येष्ठ मास में पांच मंगलवार पड़ रहे हैं और इनमें से तीसरा बड़ा मंगल विशेष महत्व रखता है। आइए, तीसरे बड़े मंगल की तिथि, धार्मिक महत्व और पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
तीसरा बड़ा मंगल की तिथि (Third Bada Mangal Date)
2025 में ज्येष्ठ मास 13 मई से शुरू होकर 10 जून तक चलेगा। इस दौरान पांच मंगलवार बड़े मंगल के रूप में मनाए जाएंगे। तीसरा बड़ा मंगल 27 मई 2025 को मनाया जाएगा। तीसरा बड़ा मंगल विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ज्येष्ठ मास के मध्य में पड़ता है, जब गर्मी अपने चरम पर होती है और हनुमान जी की पूजा इस समय शीतलता, शांति, और संकटों से मुक्ति प्रदान करती है।
बड़ा मंगल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व (Bada Mangal Importance)
उत्तर भारत में बड़ा मंगल बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, खासकर लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में। इस त्यौहार की उत्पत्ति लखनऊ के नवाबी दौर से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात त्रेता युग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हुई थी, जब राम सीता की खोज कर रहे थे। इस मुलाकात ने राम और हनुमान के बीच भक्ति और सेवा का एक अटूट बंधन स्थापित किया, जिसके कारण ज्येष्ठ के मंगलवार को हनुमान पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
ऐतिहासिक कथा: लखनऊ में बड़ा मंगल की परंपरा का प्रारंभ नवाब वाजिद अली शाह के समय से माना जाता है। कथाओं के अनुसार, नवाब के पुत्र गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। सभी उपाय असफल होने पर उन्हें अलीगंज के हनुमान मंदिर में प्रार्थना करने की सलाह दी गई। मंदिर में प्रार्थना के बाद उनके पुत्र का स्वास्थ्य सुधरने लगा। नवाब और उनकी बेगम जनाब-ए-आलिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जो ज्येष्ठ मास में पूरा हुआ। इसके बाद से ज्येष्ठ के मंगलवारों को बड़ा मंगल के रूप में मनाने और भंडारे आयोजित करने की परंपरा शुरू हुई। यह परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जो सामुदायिक सौहार्द को दर्शाती है।
आध्यात्मिक महत्व: शास्त्रों में हनुमान जी को वृद्ध स्वरूप में पूजने का उल्लेख है, जिसे 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें बल, बुद्धि, और साहस की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगलवार मंगल ग्रह से संबंधित है और हनुमान पूजा से मंगल दोष और शनि की साढ़े साती का प्रभाव कम होता है।
तीसरे बड़े मंगल पर पूजा विधि (Third Bada Mangal Worship Method )
तीसरे बड़े मंगल पर हनुमान जी की पूजा विधिवत और भक्ति भाव से करने से विशेष फल प्राप्त होता है। स्नान और शुद्धि: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। गंगाजल मिला हुआ पानी शुभ माना जाता है। स्वच्छ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि ये रंग हनुमानजी को प्रिय हैं। घर के मंदिर या हनुमान मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें। हनुमानजी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ कपड़े पर स्थापित करें।
पूजा सामग्री के लिए हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर, सिंदूर, लाल या पीले फूल, चमेली का तेल, चंदन, कुमकुम, बूंदी के लड्डू, केले, मिश्री, धूप, दीप, कपूर, गंगाजल, पंचामृत, रुद्राक्ष की माला, लाल कपड़ा और साबुत चावल लीजिए।
हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प करें। फिर 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का जप करते हुए हनुमान जी का ध्यान करें और उन्हें पूजा स्थल पर आमंत्रित करें। हनुमान जी की मूर्ति पर गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। प्रत्येक सामग्री अर्पित करते समय 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का जप करें।हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल लगाएं। लाल वस्त्र अर्पित करें, क्योंकि सिन्दूर हनुमान जी की भक्ति और साहस का प्रतीक है। गेंदा, चमेली या गुलाब के फूल अर्पित करें। 11 या 21 फूलों की माला बनाकर चढ़ाना शुभ है। धूप और दीप जलाकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें। विशेष मंत्र 'ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा' का 108 बार जप करें। बूंदी के लड्डू, केले, और मिश्री प्रसाद के रूप में अर्पित करें। हनुमानजी की आरती करें और साष्टांग प्रणाम करें। मूर्ति की तीन या पांच प्रदक्षिणा करें।
यह भी पढ़ें: Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री के दिन पत्नियां क्यों डोलाती है पति को पंखा, जानिए इससे जुड़ी कहानी
यह भी पढ़ें: Jyeshtha Masik Shivratri 2025: ज्येष्ठ में मासिक शिवरात्रि कब? सभी मनोकामनाएं होगी पूरी बस कर ले ये उपाय