Bada Mangal: हनुमान जी कलियुग के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा से मंगल दोष, शत्रु भय, स्वास्थ्य समस्याएं और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। बड़े मंगल पर की गई पूजा के पुण्य कई गुना बढ़ जाते हैं।
Bada Mangal: हनुमान जी की भक्ति में बड़े मंगल का विशेष स्थान है। ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बड़े मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों को असीम कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से पहले बड़े मंगल पर विधिवत पूजा और उपाय करने से संकट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 5 मई को पहला बड़ा मंगल होगा, ऐसे में आइए जानते हैं कि इस विशेष दिन पर हनुमान जी को कैसे प्रसन्न करें।
बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास के एक मंगलवार को भगवान श्री राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इसी कारण इस महीने के सभी मंगलवारों को बड़े मंगल कहा जाता है। इन दिनों हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए इसे बुढ़वा मंगल भी कहते हैं।
हनुमान जी कलियुग के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा से मंगल दोष, शत्रु भय, स्वास्थ्य समस्याएं और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। बड़े मंगल पर की गई पूजा के पुण्य कई गुना बढ़ जाते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से प्रार्थना करने पर हनुमान जी सभी संकटों से रक्षा करते हैं और बल, बुद्धि तथा साहस प्रदान करते हैं।
उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में इस दिन हनुमान मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है। भंडारे का आयोजन, सुंदरकांड पाठ और सामूहिक आरती बड़े मंगल की विशेषताएं हैं। इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष फल मिलते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके पूजा शुरू करनी चाहिए। शुभ मुहूर्त में मंदिर जाना या घर पर पूजा करना अत्यंत लाभकारी होता है। संध्या काल में भी आरती और पाठ का विशेष महत्व है।
पूजा की तैयारी
पूजा से पहले घर को साफ-सुथरा रखें। पूजा स्थल पर लाल या केसरिया कपड़ा बिछाएं। हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करें। आवश्यक सामग्री तैयार रखें...
चमेली का तेल या तिल का तेल, केसरिया सिंदूर, लाल फूल, गेंदे के फूल, गुड़, चना, बूंदी, लड्डू, मीठा पान, घी का दीपक, अगरबत्ती, कपूर, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड की पुस्तक, भक्त लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। महिलाएं सादगीपूर्ण वस्त्र पहनें। पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
हनुमान जी की पूजा की पूरी विधि
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर बैठकर संकल्प लें कि आप हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा कर रहे हैं।
हनुमान जी के सामने तिल या चमेली के तेल का दीपक जलाएं। अगरबत्ती लगाएं।
सबसे पहले हनुमान जी को चमेली के तेल में मिलाकर केसरिया सिंदूर अर्पित करें। यह उनका प्रिय अर्पण माना जाता है। लाल फूल चढ़ाएं।
गुड़-चना, बूंदी के लड्डू और मीठा पान भोग लगाएं। कुछ भक्त चोला चढ़ाते हैं जो विशेष कृपा प्रदान करता है।
हनुमान चालीसा का पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी होता है। बजरंग बाण का पाठ भी संकट निवारण के लिए किया जाता है।
मंत्र “ॐ हं हनुमते नमः” का जाप करें। जाप की संख्या 108 या अधिक हो सकती है।
पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें। “जय हनुमान ज्ञान गुण सागर” जैसी आरती गाएं। कपूर की आरती करना शुभ होता है।
पूजा के बाद प्रसाद बांटें। परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों में बूंदी, लड्डू आदि वितरित करें।
यदि संभव हो तो हनुमान मंदिर जाकर पूजा करें। वहां चोला चढ़ाएं, घी का दीपक लगाएं और दान दें।
बड़े मंगल पर विशेष उपाय
हनुमान जी की विशेष कृपा पाने के लिए कुछ उपाय प्रभावशाली माने जाते हैं।
चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर अर्पित करें और थोड़ा सिंदूर माथे पर लगाएं।
मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति घी का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का सात या ग्यारह बार पाठ करें।
नमक का सेवन न करें और शाकाहारी भोजन लें।
यथाशक्ति गरीबों को दान दें, विशेष रूप से गुड़, चना या कपड़े।
भंडारे में भाग लें या आयोजन करें।
बड़े मंगल से जुड़ी पौराणिक कथा
कहते हैं कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी श्री राम से मिले थे। हनुमान जी ने अपने वृद्ध रूप में भी भक्ति का परिचय दिया। इसी कारण इस दिन उनके वृद्ध स्वरूप की पूजा होती है। इस दिन पूजा करने से कई लाभ प्राप्त होती हैं। बड़े मंगल पर पूजा करने से
लाभ और सावधानियां
बड़े मंगल पर पूजा करने से संकटों से मुक्ति मिलती है। शत्रु भय का निवारण होता है। स्वास्थ्य लाभ मिलता है। आर्थिक उन्नति और परिवर में में सुख-शांति आती है, लेकिन पूजा के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। पूजा में चरणामृत न चढ़ाएं। क्रोध या अशुद्ध मन से पूजा न करें। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)