Who is Acharya Satyendra Das: अयोध्या राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। उनका लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज चल रहा था। तो आज इस खबर में आचार्य सत्येंद्र दास की पूरी जीवनी के बारे में जानेंगे।
Who is Acharya Satyendra Das: अयोध्या राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। उनका लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज चल रहा था। आचार्य सत्येंद्र दास को ब्रेन हेमरेज हुआ था और उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आचार्य सत्येंद्र दास के निधन पर दुख जताया है।
कौन हैं आचार्य सत्येंद्र दास?
राम मंदिर के मुख्य पुजारी 85 वर्षीय आचार्य सत्येंद्र दास बाबरी विध्वंस से लेकर रामलला के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी रहे हैं। वह पिछले 34 वर्षों से राम जन्मभूमि परिसर में रामलला की सेवा कर रहे थे। उन्होंने 28 वर्षों तक टेंट में रहने वाले रामलला की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मुख्य पुजारी के रूप में करीब चार वर्षों तक अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला की सेवा की। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही वह मुख्य पुजारी के रूप में सेवा कर रहे हैं। स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के कारण उनके मंदिर में आने पर कोई शर्त लागू नहीं है। वह जब चाहें मंदिर आ सकते हैं।
1976 में शिक्षक की नौकरी ज्वाइन की
सत्येंद्र दास ने 1975 में संस्कृत विद्यालय से आचार्य की परीक्षा पास की और 1976 में उन्हें संस्कृत महाविद्यालय के व्याकरण विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी मिल गई। लेकिन अपने काम के साथ-साथ वह राम जन्मभूमि भी जाते थे और पूजा-पाठ से जुड़े कामों में अपना योगदान देते रहते थे। इसी तरह एक समय ऐसा भी आया कि साल 1992 में सत्येंद्र दास जी महाराज को राम जन्मभूमि का मुख्य पुजारी बना दिया गया।
सत्येंद्र दास कब बने मुख्य पुजारी
1992 में राम जन्मभूमि में मुख्य पुजारी के लिए सत्येंद्र दास का नाम तय हुआ और 1 मार्च 1992 को उनकी नियुक्ति कर दी गई। इसके बाद सत्येंद्र दास राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी बन गए और उन्होंने अपने साथ 4 सहायक पुजारी भी रखे।
आजीवन मिलेगा वेतन
मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास को आजीवन मुख्य पुजारी के तौर पर मिलने वाला वेतन मिलता रहेगा। शुरुआत में उन्हें 100 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनका वेतन बढ़कर 38500 रुपये हो गया। जब उनकी तबीयत खराब हुई तो श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन्हें कार्यभार से मुक्त करने का अनुरोध किया था। हालांकि ट्रस्ट ने कहा कि मुख्य पुजारी पहले की तरह जब चाहें राम मंदिर आ सकेंगे। उनके आने-जाने और पूजा-अर्चना पर कोई रोक नहीं रहेगी।