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Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत किसके लिए रखा जाता है, जानिए व्रत की महिमा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Ahoi Ashtami 2026:  कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अष्टमी का बहुत महत्व है। इसे 'अहोई अष्टमी' के त्योहार के रूप में जाना जाता है 

 Ahoi Ashtami 2026:
 Ahoi Ashtami 2026:  कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अष्टमी का बहुत महत्व है। इसे 'अहोई अष्टमी' के त्योहार के रूप में जाना जाता है और यह भारत में हिंदू परिवारों के बीच मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है। हिंदू महिलाओं के लिए इस दिन का विशेष महत्व है जो इस दिन 'निर्जला' व्रत रखती हैं। शाम को तारों को देखने और उन्हें 'अर्घ्य' देने के बाद यह व्रत खोला जाता है। हो सकता है कि बहुत से लोगों को इस निर्जला व्रत के पीछे के खास उद्देश्य के बारे में पता न हो यानी यह किसके लिए रखा जाता है। आइए यहाँ इस सवाल का जवाब जानते हैं। साथ ही हम अहोई अष्टमी के महत्व और इस साल के शुभ मुहूर्त के बारे में भी चर्चा करेंगे।

अहोई अष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 02:51 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 01:10 बजे समाप्त होगी। इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। 
पूजा का शुभ समय: शाम 05:36 बजे से शाम 06:54 बजे तक
तारे देखने का समय: शाम 06:00 बजे
अहोई अष्टमी पर चंद्रोदय का समय: रात 11:40 बजे

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:49 बजे से सुबह 05:41 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:55 बजे से दोपहर 02:39 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:36 बजे से शाम 06:02 बजे तक
अमृत काल: रात 10:25 बजे से रात 11:56 बजे तक

महिलाएं यह व्रत क्यों और किसके लिए रखती हैं?

भारतीय कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन अहोई माता के सम्मान में व्रत रखा जाता है और उनकी पूजा की जाती है। विवाहित महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना के लिए 'निर्जला'  व्रत रखती हैं, जबकि माताएं अपनी मौजूदा संतानों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि यदि पूरी श्रद्धा और निर्धारित नियमों के अनुसार यह व्रत रखा जाए, तो अहोई माता प्रसन्न होती हैं और भक्त की संतानों को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद देती हैं।

अहोई अष्टमी का व्रत खोलने का समय

तारे दिखने के बाद, शाम 06:28 बजे से व्रत खोला जा सकता है। तारों को 'अर्घ्य'  दिए बिना व्रत न खोलें; अन्यथा, व्रत अधूरा माना जाएगा। चंद्रमा रात 11:40 बजे निकलेगा। 

अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत बच्चों की सुरक्षा, लंबी उम्र और उनके सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है और शाम को अहोई माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान देवी की प्रतिमा या दीवार पर बनाई गई उनकी आकृति को रोली, चावल, फूल, जलता हुआ दीपक और भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ी या सुनी जाती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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