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Karwa Chauth : करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखा जाता है चांद, जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Karwa Chauth :

Karwa Chauth :
Karwa Chauth :करवा चौथ का त्योहार हर विवाहित महिला के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। इस दिन, महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए बिना पानी के  व्रत रखती हैं। रात में जब चांद निकलता है, तो महिलाएं पूजा की थाली लेकर छत पर जाती हैं। इस परंपरा की एक मुख्य बात यह है कि विवाहित महिलाएं चांद को सीधे अपनी नंगी आंखों से नहीं देखतीं बल्कि वे चांद को और उसके बाद अपने पति के चेहरे को एक छलनी के जरिए देखती हैं। हालांकि कई लोग इसे केवल प्रेम और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखते है लेकिन असल में इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो भगवान गणेश द्वारा दिए गए एक श्राप से जुड़ी है। 'द्रिक पंचांग' के अनुसार, 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा।

भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप क्यों दिया?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश कहीं जा रहे थे, तभी चंद्रमा ने उनका रूप देखकर उनका मजाक उड़ाया और हंसने लगे। चंद्रमा को अपने रूप-रंग और सुंदरता पर बहुत घमंड था। इस व्यवहार से नाराज होकर भगवान गणेश ने गुस्से में चंद्रमा को श्राप दे दिया। कहा जाता है कि भगवान गणेश ने कहा था कि जो कोई भी चतुर्थी  के दिन चंद्रमा को देखेगा, उस पर झूठे आरोप लगेंगे या उसकी बदनामी होगी। माना जाता है कि इस श्राप के कारण चंद्रमा की सुंदरता और मान-सम्मान भी कम हो गया। बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर चंद्रमा ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी। भगवान गणेश ने उन्हें माफ तो कर दिया, लेकिन चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा बनी रही। यही कारण है कि 'गणेश चतुर्थी' के दिन चंद्रमा को सीधे न देखने की सलाह दी जाती है।

करवा चौथ पर चंद्रमा को छलनी से क्यों देखा जाता है?

करवा चौथ पर चंद्रमा को छलनी से देखने की परंपरा सुहाग, प्रेम और पति-पत्नी के बीच के अटूट बंधन से जुड़ी है। व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के बाद चंद्रमा को 'अर्घ्य' देती हैं और फिर एक छलनी से चंद्रमा को देखती हैं। इसके बाद, वे उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं और उनके लंबी उम्र तथा सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।

'चतुर्थी तिथि' का क्या महत्व है?

भगवान गणेश और चंद्रमा से जुड़ी कथाओं में 'चतुर्थी तिथि' का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार भगवान गणेश ने भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा को श्राप दिया था इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। इसी कारण, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने को लेकर विशेष सावधानी बरतने की परंपरा है। करवा चौथ भी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इसलिए, कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन सीधे चंद्रमा को देखने से मना किया जाता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

 

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