Ayurveda: गर्मी के मौसम में प्यास लगने पर बहुत से लोग सीधे फ्रिज का ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं। ठंडा पानी पीते ही शरीर को राहत और ताजगी महसूस होती है, लेकिन क्या हर समय ठंडा पानी पीना सेहत के लिए सही है? आयुर्वेद में पानी पीने के तापमान को लेकर क्या कहा गया है और ठंडे पानी का पाचन तंत्र पर किस तरह असर पड़ सकता है? क्या आयुर्वेद में ठंडे पानी को पूरी तरह से गलत माना गया है? आइए जानते हैं आयुर्वेद के नजरिए से ठंडा पानी पीने से जुड़ी जरूरी बातें...
आयुर्वेद में पानी के तापमान का महत्व
आयुर्वेद में पानी को केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसके तापमान को भी शरीर की प्रकृति और स्थिति के अनुसार महत्वपूर्ण माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में सामान्य तापमान का पानी आमतौर पर रोजमर्रा के सेवन के लिए उपयुक्त माना जाता है। वहीं, बहुत ज्यादा ठंडे पानी को हर व्यक्ति के लिए और हर परिस्थिति में सही नहीं माना जाता। खासकर भोजन के तुरंत बाद बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने से पाचन प्रक्रिया प्रभावित होने की बात आयुर्वेदिक परंपरा में कही गई है।
ठंडा पानी पाचन पर डाल सकता है असर
आयुर्वेद में पाचन शक्ति को 'अग्नि' से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि बहुत ठंडी चीजें शरीर की गर्माहट और पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से भोजन के तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी पीने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर जिन लोगों को पहले से गैस, अपच या पेट फूलने जैसी समस्या रहती है, उनके लिए भोजन के साथ या तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी पीना परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है।
क्या ठंडा पानी पूरी तरह गलत है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि आयुर्वेद में ठंडा पानी पूरी तरह वर्जित है। आयुर्वेद में पानी के इस्तेमाल को व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, मौसम और जरूरत के अनुसार देखने की बात कही जाती है। कुछ परिस्थितियों में ठंडे पानी का इस्तेमाल शरीर को ठंडक देने के लिए किया जाता है। इसलिए समस्या केवल 'ठंडे पानी' से नहीं, बल्कि उसकी मात्रा, तापमान और उसे पीने के समय से भी जुड़ी हो सकती है।
गर्मी में ठंडा पानी क्यों पसंद आता है?
गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने और पसीना आने के कारण ठंडे पानी से तुरंत राहत महसूस हो सकती है। इसी वजह से लोग तेज धूप से आने के बाद फ्रिज का पानी पीना पसंद करते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा गर्म शरीर पर अचानक बहुत ठंडा पानी पीने के बजाय सामान्य या हल्का ठंडा पानी धीरे-धीरे पीना अधिक सहज विकल्प हो सकता है। खासकर अगर आप लंबे समय तक धूप में रहे हों या व्यायाम करके तुरंत लौटे हों, तो पानी एकदम तेजी से पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर रहता है।
भोजन के बाद कैसा पानी पिएं?
आयुर्वेदिक नजरिए से भोजन के तुरंत बाद बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने के बजाय सामान्य तापमान का पानी लेना बेहतर माना जाता है। जरूरत के अनुसार भोजन के दौरान भी थोड़ी मात्रा में पानी लिया जा सकता है। अगर भोजन के बाद प्यास लगती है तो पानी को धीरे-धीरे पीना चाहिए। बहुत अधिक मात्रा में पानी एक साथ पीने से भी पेट भारी महसूस हो सकता है।
किसे ठंडे पानी से बचना चाहिए?
जिन लोगों को ठंडा पानी पीने के बाद पेट में असहजता, गैस, ऐंठन या गले में परेशानी महसूस होती है, उन्हें इसका सेवन कम करना चाहिए। इसी तरह बहुत ठंडे पानी की आदत बनाने के बजाय सामान्य तापमान के पानी को रोजमर्रा के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को ठंडा पानी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए, ऐसा सार्वभौमिक नियम नहीं है। शरीर की प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है।
पानी पीने का सही तरीका क्या है?
पानी चाहे सामान्य तापमान का हो या ठंडा, उसे एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा में पीने के बजाय जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे पीना बेहतर है। बहुत ज्यादा प्यास लगने पर भी पानी को आराम से पीना चाहिए। अगर ठंडा पानी पीने के बाद आपको किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती, तो कभी-कभार ठंडा पानी पीना अलग बात है। लेकिन रोजाना बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने की आदत बनाने से बचना बेहतर हो सकता है, खासकर भोजन के आसपास।
आयुर्वेद का मुख्य नजरिया
आयुर्वेद में खान-पान को व्यक्ति की प्रकृति, मौसम और शरीर की स्थिति के अनुसार अपनाने पर जोर दिया जाता है। इसलिए ठंडा पानी हर व्यक्ति के लिए अच्छा या खराब है, ऐसा एक ही नियम सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। रोजमर्रा में सामान्य तापमान का पानी लेना एक आसान विकल्प है। वहीं गर्मी में ठंडा पानी पीना हो तो बहुत अधिक ठंडे या बर्फ वाले पानी की जगह हल्का ठंडा पानी लिया जा सकता है और भोजन के तुरंत बाद इसे पीने से बचा जा सकता है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)