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Baba Ramdev: बाबा रामदेव ने दिए स्वस्थ रहने के मूलमंत्र, जानें कैसे प्रदूषण में रह सकते हैं बीमारियों से दूर

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी साह
सार

Baba Ramdev Yog: योग गुरु बाबा रामदेव ने योग और सनातन पर बात की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि प्रदूषण ज्यादा है। लंबी सांस लीजिए। जिसके फेफड़े कमजोर हैं, प्रदूषण उसके भीतर जमा रहता है।

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Yog Guru Baba Ramdev: योगगुरु बाबा रामदेव ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में योग और प्राणायाम पर चर्चा की। इस दौरान बाबा रामदेव ने प्राणायाम और योगाभ्यास कर फिटनेस का संदेश भी दिया। उन्होंने बताया कि कपालभाति, अनुलोम-विलोम जैसे विकल्पों को अपनाकर हम वायु प्रदूषण की चुनौती से निपट सकते हैं। उन्होंने भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम आदि का जिक्र किया।

 

स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए उपाय 

बाब रामदेव ने जोशिले अंदाज में उन्होंने स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए कई उपाय बताए। योग के माध्यम से प्रदूषण से बचाव के बारे में बताया। उन्होंने दिल्ली के एक्यूआई को कम करने का भी तरीका बताया। साथ ही सरकार के साथ, नागरिकों को अपना कर्तव्य निभाने की अपील की। आज हरियाणा के गुरुग्राम में उन्होंने योग की संस्कृति और 'सनातन की बात' विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखीं। इसके साथ ही योग और आयुर्वेद को घर-घर में लोकप्रिय बनाने वाले रामदेव ने प्रदूषण से बचाव के लिए क्या सुझाव दिए।

 

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फेफड़ों की मजबूती के लिए योगासन और प्राणायाम

बाबा राम देव ने बताया कि प्रदूषण का प्रभाव उन लोगों पर ही ज्यादा होता है, जिनके फेफड़े कमजोर होते हैं। अगर आपके फेफड़े मजबूत होंगे तो प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। फेफड़ों की मजबूती के लिए योगासन और प्राणायाम कर फिटनेस का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि कपालभाति, अनुलोम-विलोम जैसे विकल्पों को अपनाकर हम वायु प्रदूषण की चुनौती से निपट सकते हैं। उन्होंने मंच पर ही भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम का अभ्यास करके दिखाया। योगगुरु ने कहा कि लंबी सांस लेने से फेफड़े ताकतवर होते हैं। जिनके फेफड़े मजबूत होंगे उनपर कोई प्रदूषण असर नहीं डालता। इससे 365 दिनों तक सर्दी-जुकाम, बुखार कुछ भी नहीं होता। एक होता है बीएमआई एक होता है बीआरआई यानी बाॅडी राउंड इंडेक्स। यह सही संतुलन में होना चाहिए।

 

प्रदूषण में भी कैसे मजबूत रखे फेफड़े

योग गुरु बाबा रामदेव ने योग और सनातन पर बात की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि प्रदूषण ज्यादा है। लंबी सांस लीजिए। जिसके फेफड़े कमजोर हैं, प्रदूषण उसके भीतर जमा रहता है। सुबह उठते ही जोर से सांस लेनी चाहिए। 365 दिन ऐसा करना चाहिए। जब सकारात्मक मन के साथ श्वास लेते हैं तो सिर्फ ऑक्सीजन नहीं भरती, दिव्यता शरीर में भर जाती है। पांच मिनट का कपालभाति भी करनी चाहिए। इसे शरीर अच्छा हो जाता है। सभी का पेट इतना होना चाहिए कि पेट अंदर खींचे तो पसलियां दिखें। बॉडी राउंड इंडेक्स ऐसा ही होना चाहिए। सीधे के साथ-साथ उल्टे चलें। तीन तरह के प्राणायाम करें। ये सब करने से शरीर ऑटो पायलट मोड में आ जाता है। शुद्ध हवा हमारा सांविधानिक अधिकार है, लेकिन हम जहर पीने को मजबूर हैं। एक्यूआई में तीन चीजें हैं। इसमें कार्बन, धूल और अन्य चीजें हैं। आप कमरे बंद करके पर्दे लगाकर प्राणायाम करें। इससे आपको राहत मिलेगी। प्राणायाम शरीर में सभी चीजों को बैलेंस करता है।
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सनातन पर क्या बोले बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने यह भी बताया कि योग और सनातन धर्म की तरफ उनका झुकाव कब शुरू हुआ। उन्होंने कहा, "मेरे दिल में मैकाले की शिक्षा प्रणाली के खिलाफ विद्रोह था। मैं ब्रिटिश परंपरा में शिक्षित नहीं होना चाहता था। मैं अंग्रेजों का मानसिक गुलाम नहीं बनना चाहता था। मैं आर्थिक और सांस्कृतिक गुलामी स्वीकार नहीं कर सकता था। मुझे गुरुकुल परंपरा में पढ़ने का मौका मिला। हम भी इसी परंपरा में बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। हमारे बच्चे शास्त्रों को याद करते हैं। हम बच्चों में संस्कार डालते हैं। मुझे नहीं पता था कि दुनिया मुझे योगी बना देगी... ऐसा कोई शिक्षा बोर्ड नहीं है जो सनातन धर्म की समझ के साथ शिक्षा देता हो। हम इतने स्थिर हो गए हैं कि हम सोचते ही नहीं हैं। हम अभी भी मुगलों और देश को लूटने वाले हमलावरों का महिमामंडन कर रहे हैं। हर राज्य की शिक्षा प्रणाली बदलनी चाहिए। भगवा भावना हर किसी के अंदर है। लोगों ने सब कुछ आज़मा लिया है। भारत सनातन परंपरा का देश है। आप इसे नकार नहीं सकते।"

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