
Story of lord Ganesha Birth: भगवान गणेश जी बुद्धि, समृद्धि और सफलता के देवता हैं। वह भक्तों के समस्त विघ्न हर लेते हैं और उनका जीवन अपार खुशियों से भर देते हैं। लेकिन अधिकतर लोग उनकी जन्म की कथा से अंजान है। तो आइए जानते हैं कि गणेश जी की जन्म की क्या कहानी है।
पैराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि एक बार देवी पार्वती स्नान करने जा रही थीं, तो उन्होंने नंदी को द्वार पर पहरा देने के लिए कहा, ताकि कोई भी भीतर ना आ सके। लेकिन जब शिव जी आए तो वह भीतर जाना चाहते थे और नंदी उनकी आज्ञा का नहीं टाल सकते थे। तब शिव जी भीतर चले जाते हैं और इस पर पार्वती बहुत क्रोधित हुईं। तब उन्हें लगता है कि भगवान शिव की आज्ञा का पालन करने वाले और आज्ञाकारी तो बहुत हैं, लेकिन मेरे पास मेरी आज्ञा का पालन करने वाला कोई भी नहीं हैं। इस बात पर फिर वह समाधान खोजने लगती हैं, फिर माता पार्वती जी ने अपने शरीर से हल्दी का लेप निकाला और फिर उसमें प्राण फूंक दिए और इस प्रकार से भगवान गणेश जी का जन्म हुआ। भगवाव गणेश का शरीर दिखने में बहुत ही कोमल और दिव्य था। गणेश जी का जन्म हल्दी से संबंधित है इसलिए शुभ कार्यों में हल्दी रखना शुभ माना जाता है और गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें हल्दी की गांठे भी अर्पित की जाती हैं।
माता पार्वती जी जब स्नान के लिए जाती हैं तो द्वार पर गणेश जी को पहरेदारी के लिए खड़ा कर देती हैं ताकि कोई भी भीतर ना आ सके। गणेश जी बहुत आज्ञाकारी होते हैं और वह किसी को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं देते हैं। लेकिन जब शिव जी आए तो गणेश जी ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। शिव जी इनते क्रोधित हो गए कि उन्होंने क्रोध में आकर गणेश जी का सिर काट दिया।
माता पार्वती को जब यह पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुईं। उन्होंने शिव जी को श्राप दिया कि अगर उन्होंने गणेश को जीवित नहीं किया तो वह सृष्टि का नाश कर देंगी। तब शिव जी अपना गणों को आदेश दिया कि जिस भी प्राणी का सिर सबसे पहले दिखे उसे काटकर ले आओ। तब वह हाथी का सिर लेकर आते हैं और गणेश जी के मस्तक पर लगाते हैं।
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