विज्ञापन
Home  mythology  shiv nandi who is gatekeeper of kailash know secret of nandi supreme devotee of lord shiva

Shiv Nandi: कौन हैं कैलाश के द्वारपाल? जानिए भगवान शिव के परम भक्त नंदी का रहस्य

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Shiv Nandi: सनातन धर्म में भगवान शिव को सभी देवी-देवताओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। वैसे तो सप्ताह के सभी दिनों में भगवान महादेव की पूजा करने का विधान है, लेकिन सोमवार को भगवान की विशेष पूजा की जाती है।

Shiv Nandi
Shiv Nandi: सनातन धर्म में भगवान शिव को सभी देवी-देवताओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। वैसे तो सप्ताह के सभी दिनों में भगवान महादेव की पूजा करने का विधान है, लेकिन सोमवार को भगवान की विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही जीवन के दुखों से मुक्ति पाने के लिए व्रत भी किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनचाहा वर मिलता है। साथ ही लोग भगवान शिव के मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं।

क्या है मान्यता

भगवान शिव के मंदिर में नंदी विराजमान होते हैं। क्योंकि नंदी भगवान शिव के परम भक्त हैं। शिव मंदिर में नंदी के कान में बोलकर उनकी मनोवांछित इच्छा पूरी करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव तपस्वी हैं। वे हमेशा समाधि में रहते हैं। भगवान महादेव की तपस्या में कोई बाधा न आए, इसके लिए नंदी जी भगवान तक मनोकामनाएं पहुंचाने का काम करते हैं। 

ऐसे में उनकी समाधि और तपस्या में कोई बाधा नहीं आती है। इसलिए नंदी हमारी मनोकामनाएं भगवान शिव तक पहुंचाते हैं। इसलिए लोग मंदिर में जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। आपको बता दें कि नंदी को भगवान शिव का द्वारपाल कहा जाता है। भगवान महादेव के दर्शन से पहले नंदी के दर्शन किए जाते हैं।

इस तरह नंदी शिव की सवारी बन जाते हैं

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में शिलाद नाम के एक ऋषि थे। उन्होंने अपने जीवन में भगवान शिव की बहुत तपस्या की और नंदी को पुत्र के रूप में प्राप्त किया। उन्हें वेद और पुराणों का ज्ञान था। एक बार ऋषि के आश्रम में दो संत आए। भगवान शिव के आदेश पर उन्होंने संतों की अधिक सेवा की। इसके बाद संतों ने ऋषि को लंबी आयु का वरदान दिया। लेकिन नंदी के लिए एक भी शब्द नहीं कहा।

जब संतों ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि नंदी की आयु कम है। पिता ऋषि शिलाद को उनकी बहुत चिंता हुई। तब नंदी ने उन्हें समझाया कि पिता जी आपने मुझे भगवान महादेव की कृपा से प्राप्त किया है, इसलिए मेरे प्राणों की रक्षा वही करेंगे। इसके बाद नंदी ने शिव जी की और तपस्या की। इससे महादेव प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे अपना वाहन बना लिया।

उन्होंने नंदी को अपना वाहन क्यों चुना क्योंकि शिव जी ने कहा कि मेरी सारी शक्तियां नंदी में ही विद्यमान हैं। माता पार्वती और नंदी की सुरक्षा मेरे पास है। सनातन धर्म में बैल को बहुत भोला माना जाता है, लेकिन वह बहुत काम करता है। भगवान शिव ने उसकी मेहनत और जटिलता के कारण ही बैल के रूप में नंदी को अपना वाहन बनाया।

भगवान शंकर की ओर क्यों है नंदी का मुख?

नंदी जी का मुख भगवान शिव की ओर है। उनकी यह मुद्रा महादेव के प्रति अटूट ध्यान और भक्ति का प्रतीक है। उनका ध्यान केवल अपने आराध्य पर ही केंद्रित रहता है।

यह भी पढ़ें- Shiv Parvati Vivah Katha: अनोखी है शिव-पार्वती के विवाह की कहानी, जानिए इस पावन मिलन का रहस्य!

यह भी पढ़ें- Kalki Avatar : भगवान विष्णु कब लेंगे कल्कि अवतार? जानिए किस पुराण में किया गया है उल्लेख!

 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel