Radhashtami 2026: राधा रानी को ब्रज में कई नामों से पुकारा जाता है। भक्त उन्हें राधा रानी, राधिका, श्रीजी, लाड़ली जी और किशोरी जी के नाम से स्मरण करते हैं। इनमें ‘किशोरी जी’ नाम विशेष रूप से बरसाना और ब्रज की भक्ति परंपरा में प्रचलित है। राधा रानी को इस नाम से क्यों पुकारा जाता है, इसके पीछे अष्टावक्र ऋषि से जुड़ी एक कथा कही जाती है। इस कथा में राधा रानी के मुस्कुराने और अष्टावक्र ऋषि के प्रसन्न होने का प्रसंग आता है। इसी प्रसंग के अंत में अष्टावक्र ऋषि राधा रानी को आजीवन किशोरी रहने का वरदान देते हैं। इसी वजह से राधा रानी को ‘किशोरी जी’ कहा जाने लगा, ऐसी धार्मिक मान्यता है। आइए जानते हैं राधा रानी के इस नाम के पीछे छिपी पौराणिक कथा के बारे में...
अष्टावक्र ऋषि कौन थे?
कथा की शुरुआत अष्टावक्र ऋषि से होती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार अष्टावक्र ऋषि का शरीर जन्म से ही आठ स्थानों से टेढ़ा था। इसी कारण उनका नाम अष्टावक्र पड़ा। वे महान विद्वान और ज्ञानी ऋषि माने जाते हैं। कहा जाता है कि अष्टावक्र ऋषि के पिता ऋषि कहोड़ थे। जब अष्टावक्र अपनी माता के गर्भ में थे, तब उन्होंने अपने पिता को शास्त्रों का पाठ करते हुए सुना। कथा के अनुसार गर्भ में ही उन्होंने अपने पिता के पाठ में हुई त्रुटि की ओर संकेत किया। इससे उनके पिता क्रोधित हो गए और उन्होंने गर्भस्थ बालक को आठ अंगों से टेढ़ा पैदा होने का श्राप दे दिया। आगे चलकर वही बालक अष्टावक्र ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए।
जब बरसाना पहुंचे अष्टावक्र ऋषि
एक समय अष्टावक्र ऋषि ब्रज के बरसाना पहुंचे। उनके शरीर का आकार सामान्य नहीं था। उन्हें देखकर वहां मौजूद कुछ लोग हंसने लगे। कथा के अनुसार अष्टावक्र ऋषि को यह देखकर क्रोध आया। अष्टावक्र ऋषि ने अपने योगबल से उन लोगों को पत्थर बना दिया। उसी समय वहां श्रीकृष्ण और राधा रानी भी मौजूद थीं। वहां की स्थिति देखकर राधा रानी के मुख पर मुस्कान आ गई। राधा रानी को मुस्कुराते हुए देखकर अष्टावक्र ऋषि को लगा कि वह भी उनके शरीर को देखकर हंस रही हैं। इससे ऋषि को क्रोध आया और उन्होंने राधा रानी की ओर देखा।
श्रीकृष्ण ने अष्टावक्र ऋषि से कही यह बात
कथा के अनुसार अष्टावक्र ऋषि को क्रोधित देखकर श्रीकृष्ण ने उन्हें शांत किया। श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि राधा रानी के मुस्कुराने का कारण पहले जान लेना चाहिए। इसके बाद अष्टावक्र ऋषि ने राधा रानी से पूछा कि वह उन्हें देखकर क्यों मुस्कुरा रही थीं। राधा रानी ने तब जो उत्तर दिया, उसे सुनकर अष्टावक्र ऋषि का क्रोध शांत हो गया। राधा रानी ने बताया कि वह अष्टावक्र ऋषि के शरीर को देखकर नहीं मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने तो ऋषि के भीतर भगवान के दर्शन किए थे। उनके मन में ऋषि के प्रति उपहास का कोई भाव नहीं था। राधा रानी का यह उत्तर सुनकर अष्टावक्र ऋषि प्रसन्न हो गए।
अष्टावक्र ऋषि ने राधा रानी को दिया वरदान
राधा रानी की बात सुनकर अष्टावक्र ऋषि का मन प्रसन्न हो गया। उन्हें समझ आया कि राधा रानी उनके बाहरी रूप को देखकर नहीं, बल्कि उनके भीतर भगवान के स्वरूप को देखकर मुस्कुराई थीं। कथा के अनुसार राधा रानी के इस भाव से प्रसन्न होकर अष्टावक्र ऋषि ने उन्हें वरदान दिया कि वे सदैव किशोरी अवस्था में रहेंगी। उन्हें कभी वृद्धावस्था प्राप्त नहीं होगी। इसी वरदान को राधा रानी के ‘किशोरी जी’ नाम से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार राधा रानी का स्वरूप सदैव किशोरी रूप में ही माना गया है, इसलिए भक्त उन्हें प्रेम और श्रद्धा से ‘किशोरी जी’ या 'किशोरी जू' कहकर पुकारते हैं।
इसी वजह से राधा रानी कहलाती हैं किशोरी जी
राधा रानी के ‘किशोरी जी’ नाम के पीछे यही अष्टावक्र ऋषि वाली कथा ब्रज में प्रचलित है। कथा में अष्टावक्र ऋषि द्वारा दिए गए वरदान के कारण राधा रानी के सदैव किशोरी रूप में रहने की बात कही गई है। ब्रज की भक्ति परंपरा में राधा रानी को ‘किशोरी जी’ कहकर पुकारना आज भी बहुत सामान्य है। बरसाना में राधा रानी को लाड़ली जी और किशोरी जी जैसे नामों से श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। राधाष्टमी के अवसर पर भी भक्त राधा रानी के इसी किशोरी स्वरूप का स्मरण करते हैं।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)