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Panchbali Kya Hai: पंचबलि का क्या है महत्व, जानें इस दौरान किन 5 जगहों पर निकाला जाता है पितरों का खाना

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Panchbali Kya Hai: श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू धर्म में इन दिनों का विशेष महत्व है. पितृ पक्ष में पितरों की मुक्ति के लिए कर्म किए जाते हैं।

Panchbali Kya Hai
Panchbali Kya Hai: श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू धर्म में इन दिनों का विशेष महत्व है. पितृ पक्ष में पितरों की मुक्ति के लिए कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर पितर नाराज हो जाएं तो घर की तरक्की में बाधाएं आने लगती हैं। यही वजह है कि पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और अमावस्या तिथि तक चलता है। 

माना जाता है कि पितृ पक्ष में हमारे पितर पशु-पक्षियों के माध्यम से हमारे पास आते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं. जिन जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों के माध्यम से हमारे पितर भोजन ग्रहण करते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं, वे हैं गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी, जिन्हें महाबली कर्म कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि महाबली कर्म किसे कहते हैं। 

महाबली कर्म क्या है? 

पितृ पक्ष में जब हम श्राद्ध करते हैं तो हम अपने पितरों के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालते हैं और उस भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए और चींटी के लिए निकालते हैं, तभी श्राद्ध कार्य पूर्ण होता है। श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन के पांच हिस्से मुख्य रूप से गाय, कुत्ते, चींटी, कौए और देवताओं के लिए निकाले जाते हैं। भोजन का जो हिस्सा हम निकालकर इन पांच स्थानों पर चढ़ाते हैं, उसे पंचबली कर्म कहते हैं।

पितृ पक्ष में जब हम श्राद्ध करते हैं तो हम अपने पितरों के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालते हैं और उस भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए और चींटी के लिए निकालते हैं, तभी श्राद्ध कार्य पूर्ण होता है। श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन के पांच हिस्से मुख्य रूप से गाय, कुत्ते, चींटी, कौए और देवताओं के लिए निकाले जाते हैं। भोजन का जो हिस्सा हम निकालकर इन पांच स्थानों पर चढ़ाते हैं, उसे पंचबली कर्म कहते हैं।

यह बलि किसी पशु या पक्षी की बलि नहीं है, बल्कि पितृ पक्ष में पंचबलि का अर्थ है पितरों को पांच तरीकों से भोजन देना या उन पांच लोगों, उन तत्वों या दुनिया के उन प्राणियों को भोजन देना, जिनके संपर्क में आने से हमें अपने पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

पंचबलि कर्म की विधि?

पंचबलि का अर्थ मारना या काटना बिलकुल नहीं है। सबसे पहले हवन कुंड में उपला या कंडे को जलाएं और फिर उसमें 3 बार अन्न की आहुति दें। श्राद्ध कर्म में अगर आपको किसी को, ब्राह्मण को, किसी गरीब को या खुद को भोजन कराना है तो उससे पहले अलग-अलग जगहों पर भोजन का हिस्सा निकाल लें। उसके बाद गाय, कुत्ते, चींटी और देवताओं के लिए पत्ते पर भोजन निकाल लें। कौओं के लिए जमीन पर भोजन का हिस्सा निकाल लें और फिर प्रार्थना करें कि पितर उनके माध्यम से भोजन ग्रहण करें। सारा भोजन निकालने के बाद आप उसे गाय को खिला सकते हैं, कौओं के लिए छत के किनारे या छत के किसी कोने में अलग से जगह रखें।

पंचबलि के लिए सिर्फ इन पांच प्राणियों को ही क्यों चुना गया?

कुत्ता जल तत्व का प्रतीक है। चींटी अग्नि तत्व का प्रतीक है। कौआ वायु तत्व का प्रतीक है। गाय पृथ्वी तत्व का प्रतीक है और देवताओं को आकाश तत्व का प्रतीक माना जाता है। इस तरह इन पांचों को भोजन कराकर हम पांच तत्वों के प्रति अपना आभार प्रकट करते हैं। हमारा शरीर इन पांच तत्वों से बना है और जब हम शरीर छोड़ते हैं तो यह अपने स्थान पर चला जाता है और सभी पांच तत्वों में विलीन हो जाता है।

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