facebook pixel
विज्ञापन
Home  mythology  hanuman ji ko chameli ka tel kyon chadhaya jata hai janiye iske pichhe ka dharmik mahatva aur rahasya

Lord Hanuman: हनुमान जी को चमेली का तेल क्यों चढ़ाते हैं? जानिए इसके पीछे का धार्मिक महत्व और रहस्य

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Lord Hanuman: धार्मिक परंपराओं में चमेली के तेल को हनुमान जी को अर्पित करने योग्य माना गया है। चमेली की सुगंध और तेल का प्रयोग लंबे समय से पूजा-पाठ में किया जाता रहा है। 

Lord Hanuman:
Lord Hanuman: हनुमान जी की पूजा में सिंदूर, लाल फूल और चमेली के तेल का विशेष महत्व माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को मंदिरों में अक्सर भक्त हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली का तेल चढ़ाते हुए नजर आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चमेली का तेल बजरंगबली को प्रिय माना जाता है और इसे अर्पित करने से भक्त को उनकी कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। लेकिन आखिर हनुमान जी को चमेली का तेल ही क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे कौन-सी पौराणिक मान्यता जुड़ी है? क्या चमेली के तेल का संबंध हनुमान जी के स्वरूप और उनकी पूजा-विधि से है? आइए जानते हैं इससे जुड़ा धार्मिक महत्व और रहस्य।

चमेली के तेल का हनुमान जी से संबंध

सनातन धर्म की मान्यताओं में हनुमान जी को बल, बुद्धि, साहस और भक्ति का प्रतीक माना गया है। उनकी पूजा में कई तरह की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं, लेकिन चमेली का तेल और सिंदूर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मान्यता है कि चमेली के तेल से हनुमान जी का अभिषेक या उनकी प्रतिमा पर तेल अर्पित करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं। हनुमान जी को चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा मुख्य रूप से मंगलवार और शनिवार को अधिक देखने को मिलती है। भक्त श्रद्धा के साथ तेल चढ़ाते हैं और हनुमान जी से अपने कष्टों को दूर करने तथा संकटों से रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं।

शनिवार से जुड़ी मान्यता

हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाने की एक प्रमुख धार्मिक मान्यता का संबंध शनिदेव से भी बताया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार शनिदेव को हनुमान जी से सामना करना पड़ा था। कथा के अलग-अलग रूपों में इस प्रसंग का वर्णन मिलता है, लेकिन प्रचलित मान्यता यह है कि हनुमान जी ने शनिदेव को अपने भक्तों को कष्ट न देने का वचन दिलाया था।

इसी वजह से शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा और उन्हें तेल अर्पित करने की परंपरा विशेष मानी जाती है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से शनिदेव की प्रतिकूलता से राहत मिलती है। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है और इसके पीछे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कथाएं भी प्रचलित हैं।

 

Lord Hanuman:

चमेली का तेल क्यों माना जाता है प्रिय

धार्मिक परंपराओं में चमेली के तेल को हनुमान जी को अर्पित करने योग्य माना गया है। चमेली की सुगंध और तेल का प्रयोग लंबे समय से पूजा-पाठ में किया जाता रहा है। हनुमान जी की पूजा में इसे अर्पित करने का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करना माना जाता है। मान्यता है कि चमेली के तेल के साथ सिंदूर अर्पित करना भी हनुमान जी की पूजा में विशेष फलदायी माना जाता है। कई मंदिरों में भक्त पहले चमेली का तेल चढ़ाते हैं और फिर सिंदूर अर्पित करते हैं।

सिंदूर और तेल से जुड़ी पौराणिक कथा

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने के पीछे एक प्रसिद्ध कथा रामायण परंपरा में मिलती है। मान्यता के अनुसार, एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा। जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो माता सीता ने बताया कि वह भगवान श्रीराम की लंबी आयु और मंगल के लिए सिंदूर लगाती हैं। यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि यदि थोड़े से सिंदूर से प्रभु श्रीराम का कल्याण होता है, तो पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने से श्रीराम को और अधिक लाभ मिलेगा। इसके बाद उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। इसी मान्यता के कारण हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा प्रचलित हुई। कई स्थानों पर सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर बजरंगबली को अर्पित किया जाता है।

 

Lord Hanuman:

मंगलवार को तेल चढ़ाने की मान्यता

मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और मंदिर जाकर बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार को हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। भक्त इसे संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति की श्रद्धा से भी जोड़कर देखते हैं।

कैसे चढ़ाएं चमेली का तेल

हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाते समय सबसे जरूरी चीज श्रद्धा और पूजा की शुद्धता मानी जाती है। भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद हनुमान मंदिर जाते हैं। इसके बाद बजरंगबली को प्रणाम कर चमेली का तेल अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाने की भी परंपरा है। हालांकि, मंदिर में पूजा करते समय वहां की परंपरा और पुजारी के निर्देश का पालन करना उचित माना जाता है।

तेल चढ़ाने का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को चमेली का तेल अर्पित करना उनकी विशेष कृपा पाने का एक माध्यम माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इससे बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा करते हैं। खासकर शनिवार को हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाने की परंपरा को शनिदेव से जुड़ी मान्यताओं के कारण विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि शनिवार के दिन हनुमान मंदिरों में तेल और सिंदूर अर्पित करने वाले भक्तों की संख्या अधिक दिखाई देती है।

यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel