Bhagwan Vishnu Matsya Avatar: भगवान श्री हरि विष्णु को संसार का पालनहार और संचालक कहा जाता है। भगवान विष्णु ने अनेक अवतार लिए हैं। उनमें से एक है मत्स्य अवतार। आइए इस अवतार के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Bhagwan Vishnu Matsya Avatar: भगवान श्री हरि विष्णु को संसार का पालनहार और संचालक कहा जाता है। भगवान विष्णु ने अनेक अवतार लिए हैं। उनमें से एक है मत्स्य अवतार। दरअसल शास्त्रों में भगवान श्री हरि विष्णु के हर अवतार के पीछे कोई न कोई उद्देश्य बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार लेने के पीछे एक उद्देश्य था। श्री नारायण विष्णु का उदेश्य सृष्टि का उद्धार करना था। आज इस खबर में हम आपको श्री हरि के मत्स्य अवतार के बारे में बताएंगे। साथ ही ये भी बताएंगे कि कैसे उन्होंने ये अवतार लेकर सृष्टि का उद्धार किया।
मत्स्य अवतार श्री हरि ने सृष्टि के अंत में लिया था, दरअसल जब सृष्टि का अंत निकट था और कुछ ही समय बचा था, तब भगवान ने मत्स्य रूप में अवतार लिया था। ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्री हरि ने सृष्टि के उद्धार के लिए मत्स्य अवतार लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उस समय एक सत्यव्रत नाम का एक प्रतापी राजा हुआ करता था। एक दिन वो राजा कृतमाला नदी में स्नान कर रहा था। स्नान करने के बाद उसने भगवान सूर्य को देने के लिए नदी से जल अपनी हथेली में लिया। उसी जल के साथ उसकी हथेली में एक छोटी सी मछली आ गई।
राजा को मछली पर दया आ गई
राजा सत्यव्रत ने मछली को फिर से नदी में छोड़ दिया, लेकिन तभी मछली की आवाज आई। मछली बोली, "हे राजन, इस नदी में बड़े-बड़े जीव हैं। वे अपने से छोटे जीवों को मारकर खा जाते हैं। कृपया मेरी जान बचाइए।" मछली की यह बात सुनकर राजा को दया आ गई। इसके बाद राजा ने मछली को अपने कमंडल में रखा और महल में ले आए। अगली सुबह जब राजा उठे तो उन्हें आश्चर्य हुआ।
मछली बड़ी हो गई थी
राजा सत्यव्रत ने देखा कि जिस कमंडल में उन्होंने मछली को रखा था, वह उसके लिए छोटा पड़ने लगा था। क्योंकि मछली बड़ी हो गई थी। राजा को देखते ही मछली बोली, "हे राजन, मैं यहां रहने में असमर्थ हूं। कृपया मेरे रहने के लिए कोई और जगह का प्रबंध कीजिए।" तब राजा ने मछली को कमंडल से निकालकर पानी के घड़े में डाल दिया। फिर रात भर में मछली का आकार उस घड़े से भी बड़ा हो गया। वह घड़ा भी मछली के लिए छोटा पड़ने लगा।
ऐसा करते-करते मछली का आकार इतना बड़ा हो गया कि राजा ने उसे सरोवर में डाल दिया। कुछ समय बाद उसका आकार इतना बड़ा हो गया कि उसे सागर में डाल दिया गया। जब वह मछली सागर से भी बड़ी हो गई तो राजा ने विनम्रतापूर्वक पूछा कि आप मछली के रूप में कौन हैं, जिसके सामने यह सागर भी छोटा लगता है। तब भगवान श्री हरि ने कहा कि उन्होंने हयग्रीव राक्षस को मारने के लिए अवतार लिया है।
दैत्य हयग्रीव ने वेदों को चुरा लिया
भगवान श्री हरि ने कहा कि दैत्य हयग्रीव ने वेदों को चुरा लिया है, जिसके कारण पूरे संसार में अज्ञान और अधर्म फैल गया है। उन्होंने सत्यव्रत राजा से कहा कि आज से 7 दिन बाद सृष्टि पर प्रलय आएगा। उस प्रलय में यह पूरा संसार जलमगन हो जाएगा। पूरी पृथ्वी पर चारों ओर जल ही जल होगा। भगवान विष्णु ने सत्यव्रत राजा से कहा कि उस समय एक नाव आपके पास आएगी। आपको उसमें अनाज, औषधि और सप्त ऋषियों सहित सभी आवश्यक चीजें लेकर सवार होना है। भगवान ने राजा से कहा कि वे उस समय उनसे मिलेंगे।
जब पृथ्वी पर प्रलय आया
इसके बाद राजा ने भगवान की आज्ञा का पालन किया। सातवें दिन जब पृथ्वी पर प्रलय आया और पृथ्वी जल में डूबने लगी, तब सत्यव्रत को एक नाव दिखाई दी। भगवान की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने सप्त ऋषियों को बैठाया। नाव में अन्न, औषधि सहित सभी चीजें भी रख लीं। समुद्र के वेग के कारण नाव चलने लगी। चारों ओर जल ही जल था। इसी बीच भगवान ने मत्स्य रूप धारण कर सत्यव्रत और सप्त ऋषियों को दर्शन दिए।
इसके बाद जब प्रलय शांत हुआ, तब भगवान ने हयग्रीव दैत्य का वध किया और वेदों को लेकर ब्रह्मा जी को दे दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया और साथ ही चारों वेदों की भी रक्षा की। इसके साथ ही भगवान विष्णु ने सृष्टि के सभी प्राणियों का कल्याण किया। यह भी पढ़ें- Hanuman Ji Ki Katha: आखिर हनुमान जी ने समुद्र में क्यों फेंक दी रामायण, जानें पौराणिक कहानी
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