Patalpuri Temple History: प्रयागराज के ऐतिहासिक पातालपुरी मंदिर में वनवास के दौरान दशरथ पुत्र भगवान श्री राम और जनक नंदनी माता सीता ने पूजा की थी। बता दें कि यह मंदिर किले के अंदर है, यहां त्रिवेणी संगम, बड़े हनुमान मंदिर जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बहुत ही करीब है।
Prayagraj Patalpuri Temple History: प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन चंद दिनों में होने वाला है। ऐसे में सभी श्रद्धालुओं के मन में यह विचार जरूर आ रहा होगा कि प्रयागराज में महाकुंभ के अलावा और कौन-कौन से ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है। तो आज इस खबर में प्रयागराज के एक ऐसे मंदिर के बारे में जिसके दर्शन के बिना महाकुंभ अधूरा माना जाता है। बता दें कि यह मंदिर पातालपुरी के नाम से जाना जाता है।
बता दें कि यह मंदिर प्रयागराज के ऐतिहासिक किलों के प्रांगण में स्थित है, जिसे पहले इलाहाबाद किला कहा जाता था। बता दें कि इस मंदिर में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। तो आज इस खबर में प्रयागराज के सबसे पुराने मंदिर पातालपुरी मंदिर के बारे में विस्तार से जानेंगे। इसके साथ ही इस मंदिर के इतिहास और अन्य मान्यताओं के बारे में भी जानेंगे।
पातालपुरी मंदिर में भगवान श्री राम और माता सीता ने की थी पूजा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रयागराज के ऐतिहासिक पातालपुरी मंदिर में वनवास के दौरान दशरथ पुत्र भगवान श्री राम और जनक नंदनी माता सीता ने पूजा की थी। बता दें कि यह मंदिर किले के अंदर है, यहां त्रिवेणी संगम, बड़े हनुमान मंदिर जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बहुत ही करीब है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर का काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां पर जो भी भक्त पूजा-पाठ करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
पातालपुरी के पास में है अक्षयवट मंदिर
बता दें कि पातालपुरी मंदिर के बाहर ही अक्षयवट के नाम से जाना जाने वाला अमर बरगद का पेड़ है। इस बरगद के पेड़ पर तीर्थयात्री कूदते थे। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालुओं का मानना था कि ऐसा करने से पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाएगी। सभी पापों से भी छुटकारा मिल जाता है।
पातालपुरी मंदिर का खुलने का समय
प्रयागराज किला के अंदर स्थित पातालपुरी मंदिर बहुत ही ऐतिहासिक मंदिर है। बता दें कि इस मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन करने का समय सुबह के 7 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक है। इस बीच श्रद्धालु पातालपुरी मंदिर में जाकर बड़े ही आराम से दर्शन कर सकते हैं।
मंदिर के बारे में कुछ रोचक तथ्य
प्रयागराज किले के अंदर स्थित प्राचीन और पवित्र पातालपुरी मंदिर काफी धार्मिक और ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए काफी महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है।बता दें कि यह मंदिर प्रयागराज किले के भूमिगत कक्षों के भीतर स्थित है, जो अपने आप में मुगल काल का एक ऐतिहासिक चमत्कार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पातालपुरी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से की जाती है।
पातालपुरी मंदिर के पास पूज्य ऋषि मार्कंडेय ने की थी घोर तपस्या
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रयागराज किले के अंदर पातालपुरी मंदिर वह स्थान माना गया है, जहां पर पूज्य ऋषि मार्कंडेय ने घोर तपस्या की थी। मान्यता है कि ऋषि के घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने आशीर्वाद दिया था। पातालपुरी मंदिर वह स्थान भी माना जाता है जहां पर पवित्र गंगा नदी पहली बार धरती पर उभरी थी। इस मंदिर को अक्सर त्रिवेणी संगम से जोड़ा जाता है।
आखिर क्यों पड़ा इस मंदिर का नाम पातालपुरी
बता दें कि इस मंदिर के भूमिगत कक्षों को पाताल का प्रवेश द्वार माना गया है। जिसके वजह से इसका नाम पातालपुरी पड़ गया है। पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पर भक्त आते हैं और पातालपुरी तीर्थ के जल में डुबकी भी लगाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस जल में डुबकी लगाते हैं उनके सारे पाप धुल जाते हैं। इसके साथ ही आत्मा का शुद्धिकरण हो जाता है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।