Mhakumbh 2025: कुंभ मेले को लेकर एक बात प्रचलित रही है, यहां लोग अपनों से बिछड़ जाते हैं। पहले कुछ लोग अपने परिजनों से मिल जाते थे, जबकि कुछ नहीं मिल पाते थे।
Mhakumbh 2025: कुंभ मेले को लेकर एक बात प्रचलित रही है, यहां लोग अपनों से बिछड़ जाते हैं। पहले कुछ लोग अपने परिजनों से मिल जाते थे, जबकि कुछ नहीं मिल पाते थे। हालांकि प्रयागराज में पिछले आठ दशकों से मेले में बिछड़ने वालों को मिलाने की कोशिश चल रही है।
यह एक अकेले व्यक्ति का अथक प्रयास था, जो अब डिजिटल प्रयासों तक पहुंच गया है। इन दिनों जब आप प्रयागराज के महाकुंभ मेले में आएंगे, तो आपको यूपी सरकार द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित खोया-पाया केंद्र मिल जाएंगे, जो हर दिन बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का सराहनीय काम कर रहे हैं।
प्रयागराज महाकुंभ-2025 के खोया-पाया केंद्रों पर चर्चा करने से पहले आइए थोड़ा इतिहास पर नजर डालते हैं। कुंभ के अलावा प्रयागराज में माघ मेला भी लगता है, जिसका स्वरूप भी कुंभ जितना ही विशाल होता है। प्रयागराज के रहने वाले राजाराम तिवारी ने 79 साल पहले मेले में खोए हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का काम शुरू किया था। दरअसल, 1946 में जब राजाराम तिवारी 18 साल के थे, तब माघ मेले में एक बुजुर्ग महिला अपने परिवार से बिछड़ गई थी।
यह वो दौर था जब लाउडस्पीकर बहुत आसानी से उपलब्ध नहीं थे। युवा राजाराम तिवारी के प्रयासों से बुजुर्ग महिला को उसके परिवार से मिलाया गया, लेकिन राजाराम तिवारी ने मेले में एक ऐसा कैंप लगाने की ठानी, जहां खोए हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाया जा सके।
जब उन्होंने अपना खोया हुआ लोगों का कैंप शुरू किया, तो वे टिन को काटकर बनाए गए लाउडस्पीकर से मेले में खोए हुए लोगों के बारे में घोषणा करते थे। 2016 में अपनी मृत्यु तक राजाराम तिवारी ने माघ मेले, अर्धकुंभ मेले और कुंभ में 14 लाख से अधिक वयस्कों और 21,000 से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया था। लोग उन्हें खोए हुए लोगों के बाबा के नाम से जानते हैं। बाद में राजाराम तिवारी के इस प्रयास को उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। सरकार ने खोए-पाए लोगों के लिए केंद्र भी बनाने शुरू कर दिए हैं। अब सरकार के खोया-पाया केंद्र डिजिटल हो गए हैं।
इस बार महाकुंभ मेले में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास दिव्य और भव्य होने के साथ-साथ डिजिटल भी हो गए हैं। महाकुंभ मेले में सरकार ने 10 सेक्टरों में खोया-पाया केंद्र बनाए हैं, जिनमें मिलन डेस्क के अलावा प्रतीक्षालय, चिकित्सा कक्ष, परामर्श कक्ष, महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था की गई है। खोया-पाया केंद्र में दो तरह से सूचना देने का प्रावधान है।
एक तो लोग यहां आकर अपने बिछड़े परिजनों की जानकारी देते हैं, वहीं खुद खोए-पाए लोग भी केंद्र पर पहुंचते हैं। जब भी कोई परिवार या व्यक्ति खोया-पाया केंद्र पर पहुंचता है तो पूरे मेला क्षेत्र में लाउडस्पीकर से घोषणा की जाती है। महाकुंभ मेला क्षेत्र में पहुंचने पर आपको ऐसी घोषणाएं सुनाई देंगी। खोए-पाए लोगों को न सिर्फ लाउडस्पीकर से बल्कि डिजिटल माध्यम से भी खोजने का प्रयास किया जा रहा है। खोया-पाया केंद्र सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है। व्हाट्सएप ग्रुप पर तुरंत सूचना प्रसारित की जाती है।
खोया-पाया केंद्रों में सरकार की बड़ी मशीनरी लगाई गई है। किसी खोए हुए व्यक्ति या बच्चे के बारे में तत्काल सूचना आपातकालीन नंबर 1920 पर दी जा सकती है। खोया-पाया केंद्रों को दूर से ही पहचानने के लिए उनके ऊपर बड़े-बड़े गुब्बारे उड़ाए जा रहे हैं। यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025: महाकुंभ में इस अखाड़े के साधु-संत नहीं करते हैं अमृत स्नान, जानें यहां
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