Mahakumbh 2025: संगम नगरी प्रयागराज में आस्था के महापर्व महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। महाकुंभ में आने वाले अखाड़ों और संतों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हर कोई इन अखाड़ों के बारे में जानना चाहता है। आज हम आपको श्री पंच दशनाम गोदार अखाड़े के बारे में बताएंगे।
Mahakumbh 2025: संगम नगरी प्रयागराज में आस्था के महापर्व महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। महाकुंभ में आने वाले अखाड़ों और संतों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हर कोई इन अखाड़ों के बारे में जानना चाहता है। आज हम आपको श्री पंच दशनाम गोदार अखाड़े के बारे में बताएंगे।
कहा जाता है कि यह अखाड़ा शैव अखाड़ों से दान के रूप में प्राप्त संतों से बना है। इस अनोखे अखाड़े के साधुओं का काम देह त्याग चुके संतों को समाधि देना है। महाकुंभ में इस अखाड़े से विदेशी श्रद्धालु जुड़ रहे हैं।
गोदार अखाड़े के प्रमुख सोमनाथ गिरि ने बताया कि गोदार अखाड़े की स्थापना ब्रह्मपुरी महाराज ने की थी। यह अखाड़ा शैव संप्रदाय के सात अखाड़ों से संबंधित है। जहां-जहां शैव संप्रदाय के अखाड़े हैं, वहां-वहां गोदार अखाड़ा भी है।
गोदार अखाड़े के साधु शैव संप्रदाय के सातों अखाड़ों (अग्नि को छोड़कर) के मृत साधुओं को समाधि देते हैं। साधुओं के अंतिम संस्कार में भी गोड़ा अखाड़ा विशेष भूमिका निभाता है। इसका मुख्य केंद्र जूनागढ़ है। इस अखाड़े में अन्य सभी अखाड़ों से ज्यादा विदेशी शिष्य हैं। रूस और जापान से उच्च शिक्षित युवाओं की इसमें भीड़ देखने को मिलती है।
उन्होंने कहा कि हमारा अखाड़ा स्नान नहीं करता, हम यहां जनसेवा और महाकल्याण करने आते हैं। उन्होंने बताया कि जगतगुरु ब्राह्मण, ब्राह्मण गुरु संन्यासी, संन्यासी गुरु की परंपरा में गोड़ा अखाड़े का काम गोधरा अखाड़ा संभालता था।
उन्होंने कहा कि दुनिया बदल गई है, संस्कृति बदल गई है, तो हम क्यों नहीं बदलेंगे। हमारे पास बहुत काम है। शिष्यों को शिक्षा देने के बाद यह वापस अपनी जगह पर चला जाता है। यह भी पढ़ें- Digambar Ani Akhada: दिगंबर अनि अखाड़े में हुए 550 साल बाद चुनाव, जानें अखाड़े की अनूठी परंपरा
यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025: कब है महाकुंभ का आखिरी दिन, जानें अगला महास्नान की शुभ तिथि