Mahakumbh 2025: क्या आपको पता है उत्तर प्रदेश का एक ऐसा भी शहर है जहां से गंगाजल लाना मना होता है। इसके पीछे कई कारण भी है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि आखिर उत्तर प्रदेश के कौन सा ऐसा शहर है जहां से गंगाजल नहीं लाया जा सकता है।
Mahakumbh 2025: इस समय महाकुंभ का भव्य मेला का आयोजन प्रयागराज में चल रहा है। महाकुंभ से लोग अपने-अपने घरों में कई चीजें अपने-अपने घर ला रहे हैं ताकि घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। बता दें कि प्रयागराज महाकुंभ से लोग अपने-अपने घर गंगाजल भी ला रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है उत्तर प्रदेश का एक ऐसा भी शहर है जहां से गंगाजल लाना मना होता है। इसके पीछे कई कारण भी है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि आखिर उत्तर प्रदेश के कौन सा ऐसा शहर है जहां से गंगाजल नहीं लाया जा सकता है।
मोक्ष नगरी है बनारस
भगवान शिव की नगरी बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। बनारस शहर का प्राचीन नाम काशी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस नगर की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने की थी। इसीलिए इसे दुनिया का सबसे प्राचीन शहर कहा जाता है, जो शिव के त्रिशूल की नोक पर टिका हुआ है। वहीं, कहा जाता है कि यहां से दो चीजें कभी नहीं लानी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह पाप ही नहीं बल्कि महापाप करता है।
मान्यताओं के अनुसार, पवित्र नगरी बनारस से गंगा जल और मिट्टी कभी भी घर नहीं लानी चाहिए, इसे वर्जित माना जाता है। कहा जाता है कि जो कोई भी ऐसा करता है वह महापाप का भागी बन जाता है। तो आइए जानते हैं, इस मान्यता के पीछे क्या कारण है।
जीवन-मरण के चक्र से मिलती है मुक्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मोक्ष नगरी काशी में जिस भी जीव, पशु या मनुष्य की मृत्यु होती है, उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए आजकल बनारस में कई मोक्ष आश्रम बन गए हैं। लोग अपने जीवन के अंतिम समय में इन आश्रमों में आकर रहते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं।
काशी नगरी में आने से पुण्य की प्राप्ति होती है
सनातन धर्म में मान्यता है कि जब कोई किसी जीव को काशी आने के लिए प्रेरित करता है तो उस व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए कहा जाता है कि अगर किसी जीव को इस नगरी से दूर रखा जाए तो वह व्यक्ति पाप का भागी माना जाता है। ऐसे में अगर हम बनारस से गंगा जल या बनारस की मिट्टी लाते हैं तो उनमें मौजूद जीव शिव की नगरी से दूर चले जाते हैं। कहा जाता है कि अगर काशी के किसी व्यक्ति के कारण किसी जीव का मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र बाधित होता है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होता है। काशी के जीवों को मोक्ष के अधिकार से वंचित करना महापाप माना जाता है।