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Bhishma Pitamah Temple: प्रयागराज में है महाभारत के इस योद्धा का इकलौता मंदिर, तीरों की शैया पर लेटे पितामह

जीवांजलीPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Bhishma Pitamah Temple Prayagraj: महाभारत के प्रमुख योद्धाओं में से एक भीष्म पितामह थे। भीष्म पितामह अपने बल और बुद्ध के लिए काफी प्रचलित थे। बता दें कि महाभारत के भीष्म पितामह का पूरी दुनिया में इकलौता मंदिर तीर्थराज प्रयाग में स्थित है।

Bhishma Pitamah Temple Prayagraj
Bhishma Pitamah Temple Prayagraj: महाभारत के प्रमुख योद्धाओं में से एक भीष्म पितामह थे। भीष्म पितामह अपने बल और बुद्ध के लिए काफी प्रचलित थे। बता दें कि महाभारत के भीष्म पितामह का पूरी दुनिया में इकलौता मंदिर तीर्थराज प्रयाग में स्थित है। भीष्म पितामह का यह मंदिर गंगा किनारे दारागंज में नाग वासुकी मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित है, जो हजारों साल पुराना हैं। बता दें कि इस मंदिर में भीष्म पितामह की एक विशालकाय प्रतिमा विश्राम की मुद्रा में स्थापित है।

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां दिवाली और पितृपक्ष के खास मौके पर श्रद्धालु दीप जलाते हैं। इसके साथ ही भीष्म पितामह के मंदिर में एक ऐसा रहस्य भी है जिसे देखकर लोग हैरान हो जाते हैं। बता दें कि इस मंदिर में स्थापित भीष्म पितामह की प्रतिमा लोहे के तीर पर स्थापित है और इस मूर्ति में से आज भी लगातार खून निकलता रहता है।

जानें मूर्ति की लंबाई

भीष्म पितामह के मंदिर का रहस्य जानने के लिए कई तरह के प्रयास किए गए हैं। बता दें कि मंदिर के पुजारी पंडित श्याम बिहारी मिश्र जी कहते हैं कि महाभारत का जब जिक्र आता है तब गंगापुत्र भीष्म पितामह को याद किया जाता है। लेकिन पूरी दुनिया में भीष्म पितामह का ऐसा कोई भी मंदिर नहीं है। सिर्फ तीर्थराज प्रयाग में ही भीष्म पितामह की मूर्ति स्थापित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने हजारों साल पहले इस मंदिर की स्थापना की थी। बता दें कि इस मंदिर में भीष्म पितामह की मूर्ति 12 फीट लंबी स्थापित है। जिनको तीरों की शैया पर सुलाया गया है।

पितृपक्ष और दिवाली पर श्रद्धालु करते हैं दीपदान

भीष्म पितामह के मंदिर के पुजारी कहते हैं कि अब यह मंदिर धीरे-धीरे जीर्ण शीर्ण हो गया है। लेकिन आज के समय में भी जब भी दिवाली या पितृ पक्ष का समय होता है तो यहां श्रद्धालुओं की तादात बढ़ जाती है। श्रद्धालु इस मंदिर में आकर दीपदान करते हैं। बता दें कि अब इस मंदिर को प्रयागराज के धार्मिक पर्यटन सर्किट योजना में भी शामिल किया गया है। 

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