Vrat Parana: व्रत रखना जितना महत्वपूर्ण माना जाता है, उतना ही जरूरी उसका सही विधि से पारण करना भी माना गया है। हिंदू धर्म में अलग-अलग व्रत और उपवास के लिए पारण के नियम भी अलग बताए गए हैं। कई व्रतों में पारण सूर्योदय के बाद किया जाता है तो कुछ व्रतों में किसी विशेष तिथि, मुहूर्त या पूजा के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। ऐसे में केवल व्रत पूरा करना ही नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से समाप्त करना भी जरूरी माना जाता है। क्या आपको पता है कि व्रत खोलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं व्रत के पारण की सही विधि और इससे जुड़े जरूरी नियम...
व्रत का पारण क्या होता है?
व्रत या उपवास समाप्त करने की धार्मिक प्रक्रिया को पारण कहा जाता है। जिस तरह व्रत रखने से पहले संकल्प लिया जाता है, उसी तरह व्रत की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पारण करके उसे विधिवत समाप्त किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर व्रत का पारण उसकी तिथि और नियम के अनुसार करना चाहिए। उदाहरण के लिए एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। वहीं कुछ व्रत सूर्योदय के बाद खोले जाते हैं और कुछ में चंद्रमा के दर्शन या पूजा के बाद पारण करने की परंपरा होती है।
पारण से पहले करें पूजा
व्रत खोलने से पहले भगवान की पूजा करना शुभ माना जाता है। जिस देवी-देवता के लिए व्रत रखा गया है, उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान दीपक जलाकर भगवान को फल, फूल, नैवेद्य और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य सामग्री अर्पित की जा सकती है। पूजा के बाद भगवान को भोग लगाकर व्रत खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। कुछ व्रतों में दान और ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने की भी परंपरा बताई गई है।
किस चीज से खोलें व्रत?
व्रत का पारण सामान्य तौर पर हल्के और सात्विक भोजन से करना उचित माना जाता है। सबसे पहले पानी, फल या दूध जैसी चीजों का सेवन किया जा सकता है। इसके बाद अपनी व्रत परंपरा के अनुसार भोजन ग्रहण किया जाता है। यदि किसी व्रत में विशेष पारण सामग्री का उल्लेख है तो उसी के अनुसार व्रत खोलना चाहिए। जैसे कुछ व्रतों में फलाहार से पारण की परंपरा होती है, जबकि कुछ में अन्न ग्रहण करने का विधान बताया गया है।
अचानक भारी भोजन न करें
पूरे दिन या लंबे समय तक उपवास रखने के बाद अचानक बहुत अधिक या भारी भोजन करना उचित नहीं माना जाता। पारण के समय भोजन हल्का और सात्विक रखना चाहिए। पहले थोड़ी मात्रा में पानी या कोई हल्का पदार्थ लेकर कुछ समय बाद भोजन करना बेहतर माना जाता है। बहुत अधिक तला-भुना, मसालेदार या गरिष्ठ भोजन तुरंत करने से बचना चाहिए।
व्रत के नियम के अनुसार करें पारण
हर व्रत का पारण एक ही समय पर नहीं किया जाता। इसलिए व्रत खोलने से पहले उस व्रत की तिथि और पारण के समय की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। विशेष रूप से एकादशी जैसे व्रतों में पारण का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें द्वादशी तिथि के दौरान निर्धारित समय पर पारण करने की परंपरा है। इसी तरह करवा चौथ में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने का विधान है, इसलिए किसी भी व्रत में सामान्य नियम के बजाय संबंधित व्रत की परंपरा का पालन करना चाहिए।
पारण में सात्विक भोजन रखें
धार्मिक दृष्टि से व्रत के पारण में सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। भोजन में फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या अन्य व्रत में मान्य सामग्री का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सभी व्रतों में एक जैसी भोजन सामग्री मान्य नहीं होती। इसलिए जिस व्रत का पालन किया गया है, उसके नियम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए।
दान का भी है महत्व
कई व्रतों में पारण के साथ दान-पुण्य करने की परंपरा भी बताई गई है। व्रत की पूजा पूरी करने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, फल, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत के बाद जरूरतमंद को भोजन कराना और दान करना पुण्यकारी माना जाता है। हालांकि दान हमेशा अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए।
पारण का समय न करें नजरअंदाज
व्रत के पारण में सबसे महत्वपूर्ण बात उसका सही समय माना जाता है। कई बार लोग व्रत पूरा होने के बाद अपनी सुविधा के अनुसार भोजन कर लेते हैं, लेकिन धार्मिक व्रतों में ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। व्रत की तिथि समाप्त होने, सूर्योदय, चंद्र दर्शन या निर्धारित मुहूर्त के आधार पर पारण किया जाता है। इसलिए व्रत रखने से पहले ही उसके पारण का समय जान लेना चाहिए।
पारण करते समय इन बातों का रखें ध्यान
व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान का स्मरण और पूजा करें। इसके बाद व्रत के नियम के अनुसार पारण करें। भोजन सात्विक और सीमित मात्रा में लें। पारण के समय जल्दबाजी में अधिक भोजन करने से बचें। यदि व्रत किसी विशेष संकल्प या धार्मिक अनुष्ठान के साथ रखा गया है तो उसके अनुसार पूजा और पारण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। अलग-अलग व्रतों की अलग परंपराएं होने के कारण किसी एक नियम को सभी व्रतों पर लागू नहीं करना चाहिए।
व्रत खोलने की सरल विधि
व्रत का सामान्य पारण इस तरह किया जा सकता है। सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत वाले देवी-देवता की पूजा करें। दीपक जलाकर भगवान को भोग लगाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करें। इसके बाद निर्धारित समय आने पर पानी, फल या दूध से पारण शुरू करें। फिर व्रत में मान्य सात्विक भोजन ग्रहण करें। हालांकि, यदि किसी विशेष व्रत में अलग पारण विधि बताई गई है तो उसी विधि का पालन करना चाहिए। यही कारण है कि व्रत रखने के साथ उसके पारण का नियम जानना भी जरूरी माना जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)