चावल का सेवन न करें
एकादशी व्रत के दौरान चावल का सेवन नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को चावल और चावल से बनी चीजों से बचना चाहिए।
मांसाहार और नशे से बचें
परिवर्तिनी एकादशी के दिन मांसाहार, शराब और अन्य नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक आहार और संयमित दिनचर्या का पालन करना चाहिए। इस दिन भोजन से अधिक मन और विचारों की शुद्धता पर ध्यान देने की धार्मिक परंपरा रही है।
क्रोध और विवाद से बचें
एकादशी के दिन किसी से झगड़ा या विवाद करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता में इस दिन शांत रहने, भगवान का स्मरण करने और अच्छे विचार रखने पर जोर दिया गया है। इसलिए बेवजह के विवाद, क्रोध और कटु शब्दों से बचना चाहिए।
दूसरों को अपशब्द न कहें
इस दिन किसी व्यक्ति का अपमान करना या कठोर शब्द बोलना भी उचित नहीं माना जाता है। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से संयम रखने की बात कही गई है। इसलिए किसी को दुख पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
बाल और नाखून काटने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। इस दिन को पूजा-पाठ और व्रत के लिए समर्पित माना जाता है, इसलिए अनावश्यक शारीरिक श्रृंगार या ऐसे कार्यों से बचने की परंपरा है।
तुलसी दल न तोड़ें
एकादशी की पूजा में तुलसी दल अर्पित किया जाता है, लेकिन पूजा के दिन तुलसी दल तोड़ने से बचने की धार्मिक परंपरा है। इसलिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रख लेना उचित माना जाता है। तुलसी दल हमेशा स्वच्छ और श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु को अर्पित करना चाहिए।
रात में क्या करें
परिवर्तिनी एकादशी की रात भगवान विष्णु का स्मरण करना, भजन-कीर्तन करना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। जो श्रद्धालु पूरी रात जागरण करने में सक्षम हों, वे भगवान का नाम लेकर जागरण कर सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य या उम्र से जुड़ी परेशानी होने पर अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत और जागरण करना चाहिए।
व्रत का पारण सही समय पर करें
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पारण का सही समय देखकर ही व्रत खोलना चाहिए। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें और इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)