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Narak Chaturdashi: कब है रूप चौदस और छोटी दिवाली? जानें तिथि, स्नान का महत्व और पूजा से जुड़े नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके स्नान करने की परंपरा है। 

Narak Chaturdashi: 
Narak Chaturdashi: दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है और इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। इसके बाद नरक चतुर्दशी का पर्व आता है, जिसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करने, दीपक जलाने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आपको पता है कि साल 2026 में रूप चौदस और छोटी दिवाली किस दिन मनाई जाएगी? इस दिन अभ्यंग स्नान का क्या महत्व है और पूजा करते समय किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं।

कब है नरक चतुर्दशी और रूप चौदस 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। नई दिल्ली में अभ्यंग स्नान का शुभ समय सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर के वध से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, नरकासुर नाम का एक अत्याचारी असुर अपनी शक्तियों के घमंड में देवताओं और मनुष्यों को परेशान करने लगा था। उसने कई कन्याओं को बंदी बना लिया था और देवताओं की माता अदिति के कुंडल भी छीन लिए थे। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध करके नरकासुर का वध किया और उसके बंधन से कन्याओं को मुक्त कराया। मान्यता है कि इसी विजय की खुशी में नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन दीपक जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है।

अभ्यंग स्नान का क्या है महत्व?

नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है और उसे आरोग्य तथा सौंदर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि इसे रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन स्नान के लिए तिल के तेल और उबटन का इस्तेमाल किया जाता है। कई घरों में बेसन, हल्दी और चंदन से तैयार उबटन लगाया जाता है। माना जाता है कि इस तरह स्नान करने से तन और मन दोनों की शुद्धि होती है।

कैसे करें अभ्यंग स्नान?

रूप चौदस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान की तैयारी करनी चाहिए। सबसे पहले शरीर पर तिल के तेल से हल्के हाथों से मालिश करें। इसके बाद शरीर पर उबटन लगाएं और कुछ देर बाद स्नान करें। स्नान के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। नई दिल्ली में अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक रहेगा। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

छोटी दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई करके मुख्य द्वार, आंगन और घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है। इस दिन यमराज के नाम से दीपक जलाने की भी परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि यमराज के लिए दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। कई परिवारों में घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखा जाता है। इसके अलावा तुलसी के पास और मुख्य द्वार पर भी दीपक जलाए जाते हैं।

नरक चतुर्दशी पर पूजा के नियम

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद नरकासुर के वध से जुड़ी कथा का स्मरण करें। शाम के समय घर में दीपक जलाएं और यमराज के नाम से दीपदान करें। इस दिन घर को साफ-सुथरा रखना चाहिए और पूजा के स्थान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किसी से विवाद नहीं करना चाहिए और घर में शांति बनाए रखनी चाहिए। पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का स्मरण और मंत्र जाप भी कर सकते हैं।

रूप चौदस पर क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन सुबह देर तक सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। घर में गंदगी नहीं रखनी चाहिए और पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए। इसके अलावा किसी का अपमान करने, झगड़ा करने और दूसरों के प्रति कटु वचन बोलने से बचना चाहिए। इस दिन सात्विकता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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