facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  vrat›  karwa chauth par mahilayein hathon mein kyon lagati hain mehandi janiye shubhta se judi manyata

Karwa Chauth: करवाचौथ पर महिलाएं हाथों में क्यों लगाती हैं मेहंदी? जानें शुभता से जुड़ी मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Karwa Chauth: करवाचौथ पर मेहंदी के रंग को लेकर भी महिलाओं के बीच एक प्रचलित मान्यता है। कहा जाता है कि हाथों में मेहंदी जितनी गहरी रचती है, पति का प्रेम और स्नेह भी उतना ही अधिक मिलता है।

Karwa chauth
Karwa Chauth: करवाचौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। करवाचौथ की तैयारियों में पूजा की थाली, साड़ी, चूड़ियों और सोलह श्रृंगार के साथ मेहंदी लगाने की परंपरा भी खास मानी जाती है। महिलाएं अपने हाथों पर सुंदर मेहंदी रचाती हैं और इस त्योहार को उत्साह के साथ मनाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करवाचौथ पर मेहंदी लगाना इतना शुभ क्यों माना जाता है और इसके रंग को पति के प्रेम से जोड़कर क्यों देखा जाता है? आइए जानते हैं मेहंदी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और इसका महत्व।

करवाचौथ पर मेहंदी लगाने का महत्व

हिंदू परंपरा में मेहंदी को सुहाग, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक माना जाता है। करवाचौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। इस अवसर पर मेहंदी लगाना उनके श्रृंगार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। मान्यता है कि हाथों में मेहंदी रचाने से त्योहार की शुभता बढ़ती है और सुहाग से जुड़ी परंपराओं को पूरा किया जाता है। यही वजह है कि करवाचौथ से पहले महिलाएं मेहंदी लगवाने की तैयारी करती हैं।

सौभाग्य से जुड़ी है मेहंदी की मान्यता

पारंपरिक मान्यताओं में मेहंदी को सुहागिन महिलाओं के सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। करवाचौथ पर महिलाएं लाल या अन्य शुभ रंगों के पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर व मेहंदी जैसे श्रृंगार करती हैं। इन सभी का संबंध विवाहित जीवन की खुशहाली और मंगलकामना से माना जाता है। मेहंदी लगाना केवल सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि त्योहार की परंपराओं में शामिल होने का भी एक तरीका है। हालांकि, मेहंदी को शुभ मानने का आधार धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वास हैं।

मेहंदी के गहरे रंग को लेकर क्या है मान्यता?

करवाचौथ पर मेहंदी के रंग को लेकर भी महिलाओं के बीच एक प्रचलित मान्यता है। कहा जाता है कि हाथों में मेहंदी जितनी गहरी रचती है, पति का प्रेम और स्नेह भी उतना ही अधिक मिलता है। कई जगहों पर मेहंदी के गहरे रंग को ससुराल में प्रेम और अपनापन मिलने से भी जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से महिलाएं चाहती हैं कि करवाचौथ के दिन उनकी मेहंदी का रंग खूब गहरा हो। हालांकि, यह एक पारंपरिक लोकमान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। मेहंदी का रंग मुख्य रूप से उसकी गुणवत्ता, त्वचा और उसे लगाने के तरीके पर निर्भर करता है।

सोलह श्रृंगार में भी शामिल है मेहंदी

करवाचौथ पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, काजल, आभूषण और मेहंदी जैसी श्रृंगार सामग्री को शामिल किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में सोलह श्रृंगार की सूची में कुछ अंतर हो सकता है। मेहंदी को सुहागिन महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का अहम हिस्सा माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार हाथों और पैरों पर मेहंदी लगवाती हैं। कोई पारंपरिक बेल-बूटों वाला डिजाइन पसंद करती है, तो कोई फूलों, पत्तियों या दूल्हा-दुल्हन की आकृतियों वाली मेहंदी लगवाती है।

करवाचौथ से पहले क्यों लगाई जाती है मेहंदी?

करवाचौथ के दिन महिलाएं व्रत, पूजा और चंद्रमा के दर्शन की तैयारी करती हैं, इसलिए कई घरों में मेहंदी एक दिन पहले लगाई जाती है, ताकि त्योहार के दिन तक उसका रंग अच्छी तरह रच जाए। इससे महिलाएं पूजा और अन्य तैयारियों के लिए भी समय निकाल पाती हैं। मेहंदी लगाने की रस्म कई परिवारों में उत्सव का रूप ले लेती है। महिलाएं एक साथ बैठकर मेहंदी लगवाती हैं, गीत गाती हैं और त्योहार की तैयारियां करती हैं। इस तरह मेहंदी करवाचौथ की धार्मिक परंपरा के साथ-साथ आपसी मेल-मिलाप और खुशी का भी हिस्सा बन जाती है।

मेहंदी और माता पार्वती की पूजा का संबंध

करवाचौथ पर माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। इस व्रत में माता पार्वती के साथ भगवान शिव, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा का भी विधान बताया गया है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए महिलाएं उनकी पूजा करके वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की मंगलकामना करती हैं। इसी धार्मिक वातावरण में मेहंदी और अन्य श्रृंगार को शुभता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, मेहंदी लगाने की परंपरा को माता पार्वती से जोड़ने वाली मान्यताओं और स्थानीय रीति-रिवाजों में अंतर हो सकता है।

करवाचौथ पर मेहंदी लगाने की परंपरा इस त्योहार के श्रृंगार, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जुड़ी हुई है। इसके गहरे रंग को पति के प्रेम से जोड़कर देखना भी इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। महिलाएं मेहंदी लगाकर न केवल अपने हाथों को सजाती हैं, बल्कि करवाचौथ की तैयारियों और उत्सव की खुशियों में भी शामिल होती हैं।

यह भी पढ़ें:- 

Karwa Chauth : करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखा जाता है चांद, जानिए धार्मिक महत्व 

Karwa Chauth: करवा चौथ पर सरगी में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए? जानिए धार्मिक महत्व 

Karwa Chauth 2026: पहली बार रख रही हैं करवाचौथ का व्रत? तो इन नियमों का रखें ध्यान 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel