Karwa Chauth: करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को पूजा के दौरान माता पार्वती, भगवान शिव और चौथ माता की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करवाचौथ पर चौथ माता की पूजा क्यों की जाती है और उनका संबंध माता पार्वती से कैसे है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता और पूजा का महत्व।
करवाचौथ पर चौथ माता की पूजा क्यों होती है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, करवाचौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को करक चतुर्थी भी कहा गया है। इस दिन मुख्य रूप से माता पार्वती की पूजा की जाती है। कई परंपराओं में चौथ माता और गौरा माता के रूप में भी उनकी आराधना होती है। मान्यता है कि माता पार्वती अखंड सौभाग्य की प्रतीक हैं, इसलिए विवाहित महिलाएं उनकी पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।
माता पार्वती से जुड़ी है चौथ माता की मान्यता
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में माता पार्वती को आदर्श पत्नी और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास को वैवाहिक जीवन के लिए प्रेरणादायक माना जाता है। इसी वजह से करवाचौथ पर महिलाएं माता पार्वती की पूजा करके अपने पति के साथ सुखी और लंबे वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कई क्षेत्रों में चौथ माता को माता पार्वती का ही स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
अखंड सौभाग्य के लिए की जाती है पूजा
करवाचौथ पर चौथ माता की पूजा के पीछे मान्यता है कि उनकी कृपा से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन पूजा के दौरान सुहाग की सामग्री अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। महिलाएं माता से प्रार्थना करती हैं कि उनके दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और आपसी समझ बनी रहे। यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में समर्पण और एक-दूसरे के प्रति मंगलकामना की भावना को भी दर्शाता है।
शिव परिवार की पूजा का महत्व
करवाचौथ की पूजा में माता पार्वती के साथ भगवान शिव, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की आराधना भी की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव-पार्वती की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख और स्थिरता की कामना की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा परिवार में आने वाली बाधाओं को दूर करने के भाव से की जाती है। वहीं, भगवान कार्तिकेय की पूजा भी इस दिन की परंपरा का हिस्सा है। इस प्रकार करवाचौथ की पूजा केवल पति की लंबी आयु की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के कल्याण और खुशहाली से भी जुड़ी है।
कैसे की जाती है चौथ माता की पूजा?
करवाचौथ के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम को पूजा की तैयारी की जाती है और चौथ माता या माता गौरा की तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा की जाती है। माता को रोली, अक्षत, पुष्प और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की आराधना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में बैठकर करवाचौथ की कथा सुनती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करवा बदलती हैं। पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
करवा चौथ 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान शाम को पूजा का शुभ मुहूर्त नई दिल्ली में शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। महिलाएं इस समय माता पार्वती और चौथ माता की पूजा कर सकती हैं। इसके बाद चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।