Kartika Kalashtami: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का व्रत भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। कार्तिक महीने में पड़ने वाली कालाष्टमी का भी विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भैरव बाबा की पूजा करने से भय और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। लेकिन साल 2026 में कार्तिक कालाष्टमी का व्रत किस दिन रखा जाएगा? इसकी तिथि क्या है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं।
कार्तिक कालाष्टमी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर के बाद शुरू होगी और 2 नवंबर 2026, सोमवार को दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि अनुसार, कालाष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना जाता है। उन्हें समय, न्याय और सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि काल भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें भय, संकट तथा नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं। कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है। भक्त इस दिन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-शांति के लिए भी प्रार्थना करते हैं।
भगवान कालभैरव की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव का प्राकट्य भगवान शिव के रौद्र स्वरूप से हुआ था। एक कथा के मुताबिक, ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने काल भैरव का रूप धारण किया था। इसी वजह से काल भैरव को अहंकार और अधर्म का नाश करने वाला माना जाता है। उन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। मान्यता है कि काशी में भगवान विश्वनाथ के दर्शन से पहले या उनके साथ काल भैरव के दर्शन करना विशेष फलदायी होता है। कालाष्टमी पर भक्त उनकी आराधना कर जीवन में अनुशासन, सुरक्षा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रार्थना करते हैं।
कालाष्टमी पर कैसे करें पूजा?
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके भगवान शिव और काल भैरव का स्मरण करें। भगवान काल भैरव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और पुष्प, फल तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद काल भैरव के मंत्रों का जाप करें और उनसे परिवार की सुख-समृद्धि तथा सुरक्षा की कामना करें। शाम के समय भी भगवान की पूजा की जा सकती है। पूजा करते समय मन को शांत रखें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
कालाष्टमी पर कुत्तों को भोजन करवाने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में कुत्ते को भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन कुत्तों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन कुत्तों को रोटी या अन्य उपयुक्त भोजन खिलाते हैं। इसे भगवान काल भैरव के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का एक तरीका माना जाता है। हालांकि, भोजन कराते समय पशु की जरूरतों और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। इस दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।
कालाष्टमी पर किन बातों का रखें ध्यान?