Jyeshtha Skanda Sashti: सनातन धर्म में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि भगवान कार्तिकेय, स्कंद, मुरुगन और षण्मुख के रूप में पूजित देवसेनापति को समर्पित होती है। ज्येष्ठ मास में आने वाली स्कंद षष्ठी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह समय तप, संयम और उपासना का माना गया है। इस दिन श्रद्धालु भगवान कार्तिकेय की पूजा कर सुख, समृद्धि, साहस और संतानों की उन्नति की कामना करते हैं। स्कंद षष्ठी का व्रत करने के बाद उसका विधिपूर्वक पारण करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि यदि व्रत का समापन शास्त्रसम्मत विधि से किया जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
क्या होता है स्कंद षष्ठी व्रत?
स्कंद षष्ठी प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। दक्षिण भारत में भगवान मुरुगन के रूप में उनकी विशेष पूजा होती है, जबकि उत्तर भारत में भी भक्त स्कंद षष्ठी का व्रत रखकर भगवान से बल, बुद्धि और विजय का आशीर्वाद मांगते हैं। ज्येष्ठ मास की स्कंद षष्ठी में विशेष रूप से उपवास, जप और पूजा का विधान बताया गया है।
स्कंद षष्ठी व्रत का पारण कब किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंद षष्ठी व्रत का पारण षष्ठी तिथि समाप्त होने के बाद और सप्तमी तिथि के आरंभ में किया जाता है। कई श्रद्धालु षष्ठी तिथि के भीतर ही पूजा पूर्ण होने पर पारण करते हैं, लेकिन शास्त्रीय परंपरा में तिथि का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। पारण करते समय स्थानीय पंचांग में दी गई तिथि और शुभ समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि व्रत विधिपूर्वक पूर्ण हो सके।
स्कंद षष्ठी व्रत पारण की संपूर्ण विधि
व्रत के पारण से पहले प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
- भगवान गणेश का स्मरण करें।
- भगवान कार्तिकेय का ध्यान करें।
- पुष्प, अक्षत, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
- स्कंद स्तोत्र, कार्तिकेय मंत्र या षडानन स्तुति का पाठ करें।
- पूजा के बाद भगवान से व्रत में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
- जल अर्पित करके व्रत पूर्ण करने का संकल्प लें।
- इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
पारण के समय किन नियमों का पालन करना चाहिए?
स्कंद षष्ठी व्रत के पारण में कुछ धार्मिक नियमों का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से व्रत का पुण्यफल बढ़ता है।
- पारण सदैव सात्विक भोजन से करें।
- भोजन से पहले भगवान को भोग अवश्य लगाएं।
- लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से बचें।
- क्रोध, विवाद और कटु वचन बोलने से परहेज करें।
- पारण से पूर्व दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
- ब्राह्मण, गौ या जरूरतमंदों को अन्नदान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
पारण में क्या खाना शुभ माना जाता है?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत के पारण में हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण करना श्रेष्ठ माना जाता है। पारण के लिए फल, दूध, खीर, पंचामृत या घर का शुद्ध सात्विक भोजन लिया जा सकता है। कई भक्त पहले जल या पंचामृत ग्रहण करके व्रत खोलते हैं और उसके बाद भोजन करते हैं।
भगवान कार्तिकेय की पूजा में किन चीजों का विशेष महत्व है?
स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय को लाल या पीले पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजा करने का विधान है। भक्त "ॐ षडाननाय नमः" अथवा "ॐ स्कन्दाय नमः" मंत्र का जप भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्र जप और पूजा करने से भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त होती है।
ज्येष्ठ स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व