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Bhadrapada Chandra Darshan: भाद्रपद चंद्र दर्शन कब है? जानें सही तिथि, पूजन विधि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Bhadrapada Chandra Darshan: हिंदू मान्यताओं में चंद्र देव को शीतलता, मन और भावनाओं से जुड़ा देवता माना गया है। चंद्रमा को नवग्रहों में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करना शुभ माना जाता है। 

Bhadrapada Chandra Darshan
Bhadrapada Chandra Darshan: हिंदू धर्म में अमावस्या के बाद दिखाई देने वाले चंद्रमा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। चंद्र दर्शन के दिन श्रद्धालु चंद्र देव के दर्शन कर उनकी पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। भाद्रपद मास में भी चंद्र दर्शन का पर्व विशेष माना जाता है। इस दिन शाम के समय चंद्रमा के दर्शन करने और चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। क्या आपको पता है कि इस साल भाद्रपद चंद्र दर्शन किस दिन किया जाएगा और इस दिन पूजा की सही विधि क्या है? आइए जानते हैं।

भाद्रपद चंद्र दर्शन कब है?

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद चंद्र दर्शन 13 सितंबर, रविवार को किया जाएगा। यह अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर पड़ता है। अमावस्या के बाद पहली बार दिखाई देने वाले चंद्रमा को चंद्र दर्शन कहा जाता है। भाद्रपद अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन के लिए 13 सितंबर की शाम का समय महत्वपूर्ण रहेगा। अलग-अलग शहरों में चंद्र दर्शन का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। उत्तर प्रदेश के राय क्षेत्र के पंचांग के अनुसार 13 सितंबर को चंद्र दर्शन का समय शाम 6:26 बजे से 7:30 बजे तक रहेगा। वहीं ओरई के लिए यह समय शाम 6:19 बजे से 7:25 बजे तक बताया गया है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

चंद्र दर्शन का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यताओं में चंद्र देव को शीतलता, मन और भावनाओं से जुड़ा देवता माना गया है। चंद्रमा को नवग्रहों में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। चंद्र दर्शन के दिन श्रद्धालु चंद्र देव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर इस दिन व्रत रखने और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है। 

चंद्र दर्शन की पूजा विधि

चंद्र दर्शन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाकर भगवान का स्मरण करें। यदि व्रत रखना हो तो अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। शाम के समय सूर्यास्त के बाद जब चंद्रमा दिखाई दे, तब चंद्र देव के दर्शन करें। सबसे पहले एक साफ स्थान पर खड़े होकर चंद्र देव को प्रणाम करें। इसके बाद एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें थोड़े अक्षत और सफेद फूल डालें। चंद्रमा को जल अर्पित करते समय श्रद्धापूर्वक चंद्र देव का स्मरण करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर पूजा करें। चंद्र देव को सफेद फूल, अक्षत, मिठाई और सफेद रंग की अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है। पूजा के बाद चंद्र देव से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

क्या चंद्र दर्शन पर दान करना चाहिए?

चंद्र दर्शन के दिन दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, चावल, चीनी या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। दान करते समय मन में श्रद्धा और सेवा का भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। 

चंद्र दर्शन के दिन क्या करें?

इस दिन सुबह स्नान के बाद पूजा का संकल्प लें। शाम को चंद्रमा के दर्शन करें और उन्हें जल अर्पित करें। चंद्र देव को सफेद फूल और अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप से पूजा कर चंद्र देव का ध्यान करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखें और चंद्र दर्शन के बाद पूजा पूरी करके व्रत खोल सकते हैं। भाद्रपद चंद्र दर्शन का पर्व मुख्य रूप से चंद्र देव की आराधना और अमावस्या के बाद उनके प्रथम दर्शन से जुड़ा है। इसलिए इस दिन शाम के समय चंद्रमा के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करना विशेष माना जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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