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Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti: चैत्र नवरात्रि के नौ दिन, पूजा के समय पढ़ें माता रानी की आरती

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
निधि यादव
सार

Durga Mata Aarti: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है, जो मां दुर्गा की भक्ति और आराधना को समर्पित होता है।

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti
Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics: चैत्र नवरात्रि हिंदू नव वर्ष का पहला त्योहार है, जो चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष  की प्रतिपदा यानी की पहले दिन से शुरू होता है। इसका समापन नवमी को कन्या पूजन की रस्म के साथ होता है। इस साल, चैत्र नवरात्रि 19  मार्च, 2026 को शुरू हुई और 27, 2026 को राम नवमी के शुभ दिन पर समाप्त होगी। ये सभी दिन देवी दुर्गा की पूजा और आराधना के लिए समर्पित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान, देवी पृथ्वी लोक पर अवतरित होती हैं; परिणामस्वरूप, उनकी पूजा करने से भक्त के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि देवी दुर्गा की कृपा से सभी ग्रहों के दोष  दूर हो जाते हैं। इस समय देवी को प्रसन्न करने के लिए, भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं, और साथ ही उनका विशेष आशीर्वाद पाने के लिए आरती भी करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की आरती करने से न केवल परिवार में सुख और समृद्धि आती है, बल्कि पूरी पूजा का संपूर्ण आध्यात्मिक फल भी प्राप्त होता है। इसी भावना के साथ, आइए इस आरती के बारे में और जानें...
Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti

अंबे जी की आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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