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Vivah Me Agni Ka Mahatav: अग्नि के समक्ष फेरे क्यों लिए जाते हैं? जानिए विवाह की इस परंपरा का रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Vivah Me Agni Ka Mahatav: हिंदू विवाह की रस्मों में अग्नि को बहुत पवित्र माना जाता है। शादी की रस्म के दौरान, दूल्हा और दुल्हन पवित्र अग्नि के चारों ओर चक्कर लगाते हैं

Vivah Me Agni Ka Mahatav
Vivah Me Agni Ka Mahatav: हिंदू विवाह की रस्मों में अग्नि को बहुत पवित्र माना जाता है। शादी की रस्म के दौरान, दूल्हा और दुल्हन पवित्र अग्नि के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और उसे साक्षी मानकर जीवन भर साथ रहने का वचन लेते हैं। माना जाता है कि अग्नि देवताओं तक आहुति पहुँचाने का माध्यम है इसलिए अग्नि की उपस्थिति में पढ़े गए विवाह मंत्र और लिए गए वचन अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।

दूल्हा और दुल्हन अग्नि के चारों ओर चक्कर क्यों लगाते हैं?

'फेरे' दूल्हा और दुल्हन के बीच लिए गए महत्वपूर्ण वचनों का प्रतीक हैं। हर चक्कर वैवाहिक जीवन से जुड़े कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पूरा करने के संकल्प को दर्शाता है। वे सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने और जीवन की चुनौतियों का मिलकर सामना करने का वचन देते हैं। अग्नि के चारों ओर चक्कर लगाना जिसमें लौ केंद्र में होती है यह दर्शाता है कि जोड़े के जीवन में 'धर्म' और सत्य को मुख्य स्थान मिलना चाहिए। अग्नि के चारों ओर एक साथ चलना यह प्रतीक है कि वे अब जीवन की यात्रा में साथी हैं; उनका रिश्ता केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों से भी जुड़ा है।

अग्नि का पवित्रता और शुचिता से संबंध

अग्नि को पवित्रता और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। जिस तरह अग्नि अशुद्धियों को जलाकर नष्ट कर देती है, उसी तरह दूल्हा और दुल्हन पवित्र अग्नि के सामने अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हैं। अपने अतीत को पीछे छोड़ते हुए, वे विश्वास, प्रेम और जिम्मेदारी पर आधारित एक नई वैवाहिक यात्रा शुरू करने का संकल्प लेते हैं।

शादी में 'पंचमहाभूत'  का क्या महत्व है?

भारतीय परंपरा में अग्नि 'पंचमहाभूतों' में से एक है। विवाह की रस्म के दौरान अग्नि की उपस्थिति प्रकृति और ईश्वर के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाती है। अग्नि की उपस्थिति में विवाह करने का अर्थ है कि जोड़ा प्रकृति और दैवीय शक्तियों को साक्षी मानकर अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहा है। 'फेरे' न केवल पति-पत्नी के मिलन का, बल्कि दो परिवारों और दो जीवन-यात्राओं के एक साथ आने का भी प्रतीक हैं। शादी के बाद, दोनों साथियों से परिवार की भलाई बनाए रखने और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। इस प्रकार, 'फेरे' प्रेम के साथ-साथ रिश्ते में कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं।

अग्नि के सामने लिए गए वचनों का इतना महत्व क्यों हैं ? 

पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर ली गई कसमें खास मानी जाती हैं क्योंकि अग्नि को सत्य और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। जब दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे का हाथ थामकर अग्नि के सामने गंभीर वचन लेते हैं, तो वे पूरे समर्पण के साथ अपने रिश्ते का सम्मान करने का संकल्प लेते हैं। हालाँकि आज शादी की रस्मों में काफी बदलाव आए हैं, लेकिन पवित्र अग्नि के सामने 'फेरे' लेने की परंपरा आज भी कायम है। इसका कारण केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपा भावनात्मक संदेश भी है अपने जीवनसाथी के साथ विश्वास, सम्मान, सहयोग और साझा जिम्मेदारी पर आधारित जीवन जीना।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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