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Vinayaka Chaturthi Vrat Katha: विनायक चतुर्थी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि!

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Ganesh Pujan: अगर आप विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आप पूजा के समय ये कथा अवश्य सुनें। इससे आपके मन को शांति मिलेगी और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है और घर में खुशहाली बनी रहती है। 

विनायक चतुर्थी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि!
Vinayaka Chaturthi 2025 Vrat Katha Importance: विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ तिथि है, जो हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं, भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। पूजा के दौरान विनायक चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी की व्रत कथा, जो आपके घर में सुख-समृद्धि लाएगी।

पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 27 जुलाई को देर रात 10 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी और 28 जुलाई को देर रात 11 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, विनायक चतुर्थी का 28 जुलाई को मनाया जाएगा।

विनायक चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी तपस्या में लीन थे। तभी वहां से तुलसी देवी गुजर रही थीं। गणेश जी के तपस्वी रूप और उनके सौंदर्य को देखकर तुलसी देवी उन पर मोहित हो गईं। उन्होंने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया। गणेश जी उस समय तपस्या कर रहे थे और उनका विवाह करने का कोई विचार नहीं था। उन्होंने तुलसी देवी के प्रस्ताव को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि वे एक ब्रह्मचारी हैं।


गणेश जी के प्रस्ताव ठुकराने से तुलसी देवी बहुत क्रोधित हुईं। क्रोधित होकर उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि उनके दो विवाह होंगे। इस पर गणेश जी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने तुलसी देवी को श्राप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा। तुलसी देवी को जब अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने गणेश जी से क्षमा याचना की।

तब गणेश जी ने कहा कि "हे तुलसी! मेरा श्राप वापस नहीं हो सकता, लेकिन तुम भगवान विष्णु को प्रिय होगी और उन्हें सदैव पूजनीय रहोगी। तुम मोक्ष प्रदान करने वाली और पृथ्वी पर सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारी होगी, लेकिन मेरी पूजा में तुम्हारा प्रयोग कभी नहीं किया जाएगा।" इसी घटना के कारण, विनायक चतुर्थी और अन्य सभी गणेश पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित माना जाता है। गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में दूर्वा का ही उपयोग किया जाता है।

गणेश जी के दो विवाह

मां तुलसी के श्राप के कारण, भगवान गणेश जी के दो विवाह हुए। उन्होंने प्रजापति विश्वरूप की दो पुत्रियों - रिद्धि और सिद्धि से विवाह भी करना पड़ा। रिद्धि से उन्हें क्षेम (शुभ लाभ) और सिद्धि से उन्हें लाभ नामक पुत्र प्राप्त हुए।

व्रत कथा का महत्व और फल

विनायक चतुर्थी के दिन इस व्रत कथा का पाठ करने या सुनने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। यह कथा गणेश जी के प्रति आपकी श्रद्धा को बढ़ाती है और उन्हें प्रसन्न करती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इस कथा को सुनने से आपके जीवन में आने वाली सभी बाधाएं और दिक्कतें दूर होती हैं। गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि के दाता हैं। कथा सुनने से उनकी कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में धन-धान्य और खुशहाली बनी रहती है। यह कथा हमें संयम, क्रोध पर नियंत्रण और दिए गए वचन का पालन करने जैसे नैतिक मूल्यों का भी संदेश देती है। इसलिए, विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा के साथ-साथ इस कथा का श्रवण या पाठ अवश्य करें।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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