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Hanuman Ji Story: आखिर बजरंग बली ने क्यों धारण किया था शेर का रूप, जानें क्या है पौराणिक कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Hanuman Ji Story: गोविंद देव जी का मंदिर राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है, जिसमें गोविंद देव यानि श्री कृष्ण और राधा विराजमान हैं। दरअसल गोविंद देव जी का यह प्राचीन मंदिर वृंदावन में स्थित था और एक बार हनुमान जी इसकी रक्षा के लिए शेर का रूप धारण करके प्रकट हुए थे।

Hanuman Ji Story
Hanuman Ji Story: गोविंद देव जी का मंदिर राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है, जिसमें गोविंद देव यानि श्री कृष्ण और राधा विराजमान हैं। दरअसल गोविंद देव जी का यह प्राचीन मंदिर वृंदावन में स्थित था और एक बार हनुमान जी इसकी रक्षा के लिए शेर का रूप धारण करके प्रकट हुए थे। वृंदावन का यह मंदिर सात मंजिला था। मंदिर की छत पर हमेशा सात मन घी का दीपक जलाया जाता था। 

कहा जाता है कि एक रात जब मुगल बादशाह औरंगजेब अपने किले की छत पर चढ़ा तो उसने दूर से वृंदावन के मंदिर में एक दीपक जलता हुआ देखा। जब औरंगजेब ने उस दीपक को देखा तो उसे लगा कि यह चांद है। उसने अपने लिए काम करने वाले लोगों से पूछा कि आज दो चांद क्यों दिखाई दे रहे हैं तो लोगों ने उसे बताया कि यह चांद नहीं बल्कि गोविंद देव जी के मंदिर में जल रहा दीपक है। 

औरंगजेब ने गिरवा दी थीं मंदिर की चार मंजिलें

यह बात औरंगजेब को पसंद नहीं आई और उसने उस मंदिर की चार मंजिलें गिरवा दीं। उस समय सभी ब्रजवासियों ने मंदिर को बचाने के लिए प्रार्थना की और कहा जाता है कि लोगों की पुकार सुनकर हनुमान जी गोविंद देव जी के मंदिर की रक्षा के लिए सिंह के रूप में प्रकट हुए और उन्होंने औरंगजेब से कहा कि तुम यहां से चले जाओ वरना मैं तुम्हारी सात पीढ़ियों को नष्ट कर दूंगा।

कहते हैं तब औरंगजेब रुक गया और आज भी गोविंद देव जी के मंदिर के स्थान पर सिंह के रूप में हनुमान जी का मंदिर है, जहां भक्त उनके दर्शन करते हैं। भगवान गोविंद देव जी का मंदिर राजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा जयपुर लाया गया था।

हनुमान जी और नरसिंह अवतार के बीच संबंध

एक अन्य मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने भगवान नरसिंह की पूजा करने और अपनी शक्ति दिखाने के लिए सिंह का रूप धारण किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी भगवान विष्णु और उनके अवतारों के प्रति अपनी अटूट भक्ति के लिए जाने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी को नरसिंह अवतार से विशेष प्रेरणा और शक्ति मिली थी। सेवक और रक्षक की प्रकृति वाले हनुमान जी ने एक बार भगवान नरसिंह से प्रेरित होकर सिंह का रूप धारण किया था।

कई मंदिरों और ग्रंथों में हनुमान को नरसिंह अवतार से जोड़ा गया है। दक्षिण भारत के कुछ मंदिरों में हनुमान को नरसिंह हनुमान के रूप में पूजा जाता है, जिसमें वे सिंह के चेहरे और मानव शरीर के साथ दिखाई देते हैं। यह रूप उनकी अद्वितीय शक्ति और भगवान विष्णु के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाता है।

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