Pitru Paksha: पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। इस दौरान कई घरों में पितरों के निमित्त दीपक भी जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दीपक जलाना पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है। खास बात यह है कि पितरों के लिए दीपक जलाते समय दिशा का भी ध्यान रखा जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि श्राद्ध के दिन दीपक क्यों जलाया जाता है और इसे घर में कहां रखना चाहिए? आइए जानते हैं।
पितरों के लिए क्यों जलाते हैं दीपक
हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, शुद्धता और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा भी इसी श्रद्धा से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक का प्रकाश पितरों के प्रति सम्मान और उनके स्मरण का प्रतीक है। श्राद्ध के दिन तर्पण और अन्य कर्म करने के बाद या शाम के समय पितरों को याद करके दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और घर में उनका स्मरण किया जाता है।
दक्षिण दिशा में जलाने की मान्यता
पितरों के निमित्त दीपक जलाने में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। गरुड़ पुराण से संबंधित उपलब्ध पाठों में भी पितरों के कर्म में दक्षिणाभिमुख होने का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान पितरों के निमित्त दीपक घर की दक्षिण दिशा में रखने की परंपरा प्रचलित है। कई धार्मिक स्रोतों में भी शाम के समय दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जलाने का उल्लेख मिलता है।
घर में कहां रखें दीपक
अगर घर में पितरों के निमित्त दीपक जला रहे हैं तो इसे साफ स्थान पर दक्षिण दिशा में रखा जा सकता है। कुछ परिवार पितरों की तस्वीर के सामने भी दीपक जलाते हैं। ऐसी स्थिति में तस्वीर और दीपक रखने की जगह साफ-सुथरी होनी चाहिए। पितरों की तस्वीर के सामने दीपक रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि दीपक सुरक्षित स्थान पर हो और उसके आसपास कोई ज्वलनशील वस्तु न हो।
किस तेल का दीपक जलाएं
पितरों के निमित्त दीपक जलाने में तेल के दीपक की परंपरा भी बताई जाती है। कई धार्मिक मान्यताओं में तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में दीपक के तेल को लेकर परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने घर में चली आ रही परंपरा का पालन करना भी उचित माना जाता है।
शाम के समय दीपक जलाने की परंपरा
पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त दीपक शाम के समय जलाने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है। दीपक जलाते समय पूर्वजों का स्मरण किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक केवल एक पूजा सामग्री नहीं है, बल्कि यह पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का प्रतीक माना जाता है। इसलिए दीपक जलाते समय मन में श्रद्धा और सम्मान का भाव रखना महत्वपूर्ण माना गया है।
दीपक जलाते समय दिशा का रखें ध्यान
पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध से जुड़े कर्मों के लिए दक्षिण दिशा को विशेष माना गया है। वर्तमान धार्मिक व्याख्याओं में भी तर्पण के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने की बात कही गई है। इसी मान्यता के आधार पर पितरों के निमित्त दीपक भी दक्षिण दिशा में रखने की परंपरा है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)