facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  spirituality›  pitru paksha 2026 mein pitaron ka shradh karte samay kin mantro ka kare jaap janiye dharmik mahatva

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करते समय किन मंत्रों का करें जाप? जानें धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में श्राद्ध को पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम माना गया है। पितृपक्ष के दौरान परिवार के लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।

Pitru Paksha
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हिंदू धर्म में इस दौरान पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक जल, तिल और अन्न अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध कर्म के समय पितरों के निमित्त मंत्रों का जाप करने से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और परिवार के लोग उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। पितृपक्ष में श्राद्ध करते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए? इन मंत्रों का क्या अर्थ है और धार्मिक दृष्टि से इनका क्या महत्व माना जाता है? आइए जानते हैं।

पितृपक्ष में मंत्र जाप का महत्व

हिंदू धर्म में श्राद्ध को पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम माना गया है। पितृपक्ष के दौरान परिवार के लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस दौरान पितरों का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म में मंत्रों के उच्चारण से पितरों के प्रति सम्मान और समर्पण का भाव प्रकट होता है। मंत्र जाप के साथ जल अर्पित करना और पूर्वजों का स्मरण करना इस अनुष्ठान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

पितरों को नमन करने का मंत्र

पितृपक्ष में पितरों का स्मरण करते समय एक सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है। तर्पण के दौरान इस मंत्र को बोलकर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है।

मंत्र: - ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

धार्मिक अर्थ: मैं अपने पितरों को स्वधा सहित श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। इस मंत्र के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करता है और उन्हें श्रद्धापूर्वक अपना अर्पण समर्पित करता है। यह मंत्र उन लोगों के लिए भी सरल है, जिन्हें संस्कृत के लंबे मंत्रों का उच्चारण करने में कठिनाई होती है।

श्राद्ध में पढ़ें यह मंत्र

श्राद्ध और तर्पण के दौरान देवताओं, पितरों और महायोगियों को नमन करने वाला एक मंत्र भी प्रचलित है। इस मंत्र का जाप पूजा के समय किया जा सकता है।

मंत्र: - ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥

धार्मिक अर्थ: देवताओं, पितरों और महायोगियों को नमस्कार है। स्वधा और स्वाहा को बार-बार नमन है।

इस मंत्र में पितरों के साथ देवताओं और महायोगियों को भी नमन किया जाता है। श्राद्ध कर्म के दौरान इसका जाप श्रद्धा और भक्ति के भाव से किया जाता है।

पिता, दादा और परदादा के लिए मंत्र

पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की तीन पीढ़ियों का स्मरण करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसमें पिता, पितामह यानी दादा और प्रपितामह यानी परदादा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। इनके लिए अलग-अलग मंत्रों का उच्चारण किया जा सकता है।

पिता के लिए मंत्र: - पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

पितामह के लिए मंत्र: - पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

प्रपितामह के लिए मंत्र: - प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

इन मंत्रों का भाव अपनी पितृ परंपरा को नमन करना और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। तर्पण के समय परिवार की परंपरा के अनुसार इनका जाप किया जाता है।

पितरों के आवाहन का मंत्र

श्राद्ध और तर्पण के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित किया जाता है। इस अवसर पर पितरों के आवाहन का मंत्र भी बोला जाता है।

मंत्र: - ॐ आगच्छन्तु मे पितरः, इमं गृह्णन्तु जलाञ्जलिम्।

धार्मिक अर्थ: हे मेरे पितरों, आप पधारें और मेरी ओर से अर्पित इस जलांजलि को स्वीकार करें।

इस मंत्र के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों का स्मरण करता है और उनसे जल अर्पण स्वीकार करने की प्रार्थना करता है। तर्पण के दौरान पितरों का नाम और गोत्र लेकर जल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है।

पितृपक्ष में मंत्र जाप कैसे करें?

पितृपक्ष में श्राद्ध करते समय मंत्रों का जाप अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के निर्देशों के अनुसार करना चाहिए। तर्पण के दौरान पितरों का ध्यान करते हुए जल अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार जल में काले तिल और कुश का उपयोग भी किया जाता है। श्राद्ध के समय पूर्वजों का नाम, गोत्र और उनकी मृत्यु तिथि का स्मरण किया जाता है  इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण और अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

मंत्रों का उच्चारण करते समय मन को शांत रखकर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को संस्कृत मंत्रों का सही उच्चारण नहीं आता है, तो वह अपनी परंपरा के अनुसार सरल मंत्र का जाप कर सकता है। परिवार में प्रचलित विधि का पालन करना भी उचित माना जाता है।

पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है पितृपक्ष

पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण के दौरान मंत्र जाप का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस समय लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। ‘ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः’ जैसे सरल मंत्र से लेकर पितरों के आवाहन और तीन पीढ़ियों के लिए किए जाने वाले मंत्रों तक, प्रत्येक का अपना पारंपरिक महत्व है। श्राद्ध कर्म में मंत्रों का जाप करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और विधि का ध्यान रखना चाहिए।


यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel