Shiv Panchakshar Stotram: इस दिन भगवान शिव ने मां पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. इतना ही नहीं, इस दिन भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. इस दिन की जाने वाली पूजा का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि सच्चे मन और भक्ति से की गई पूजा से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिव के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से हर असंभव कार्य संभव हो जाता है.
कुंडली में काल सर्प दोष होने से लोग परेशान रहते हैं. इसके कारण कार्यों में सफलता नहीं मिल पाती. मानसिक परेशानी रहती है. कड़ी मेहनत करने के बाद भी परिणाम नहीं मिलते. अगर काल सर्प दोष की आशंका हो तो उस व्यक्ति को प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. भगवान शिव की पूजा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है. अगर आप भगवान शिव की पूजा करते समय शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करते हैं और उस समय इत्र और कपूर का प्रयोग करते हैं तो आपको काल सर्प दोष से मुक्ति मिलेगी. शिव पंचाक्षर स्तोत्र को बहुत प्रभावशाली माना जाता है. आइए जानते हैं शिव पंचाक्षर स्तोत्र के बारे में.
भक्तों के बीच पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' की महिमा काफी प्रचलित है. यह बहुत ही सरल और प्रभावी मंत्र है. कहा जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से भक्तों का कल्याण होता है. शिव जी के पंचाक्षर मंत्र का जाप करने से पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु सभी पांच तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है. मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. पंचाक्षर का हर अक्षर बहुत शक्तिशाली होता है. आपको बता दें कि इसमें पंचानन यानी पांच मुख वाले महादेव की सभी शक्तियां समाहित हैं. महाशिवरात्रि के दिन पंचाक्षर स्तोत्र का आरंभ करना सबसे अच्छा होता है. इसके जाप से हर असंभव कार्य संभव हो जाता है।
शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम:शिवाय॥1॥
मंदाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथ महेश्वराय।
मण्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम:शिवाय॥2॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय बृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम:शिवाय॥3॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम:शिवाय॥4॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नम:शिवाय॥5॥
पञ्चाक्षरिमदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥6॥