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Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में क्यों की जाती है घट-स्थापना, जानें क्या है नियम और परंपरा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Jaware Tradition: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत श्रद्धा, शुद्धता और सकारात्मक संकल्प के साथ करनी चाहिए। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से भक्त अपने भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करते हैं। 
 

Navratri Ghatasthapana
Navratri Ghatasthapana: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र पर्वों में से एक है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से घट-स्थापना या कलश स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश को शुभता, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि की पूजा में घट-स्थापना का विशेष महत्व होता है और इसे पूरे नौ दिनों की साधना की शुरुआत माना जाता है।

घट-स्थापना का अर्थ है शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना करना। इस कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। कलश को पूजा स्थल पर स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कलश को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है, जबकि कलश में मौजूद जल को पवित्रता और जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस तरह घट-स्थापना के माध्यम से घर में देवी शक्ति का स्वागत किया जाता है।

नवरात्रि में क्यों की जाती है घट-स्थापना?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश में देवी-देवताओं और पवित्र शक्तियों का वास माना जाता है। नवरात्रि में घट-स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वातावरण पवित्र होता है। यह पूजा करने वाले व्यक्ति के मन में श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक भाव को बढ़ाने का माध्यम भी मानी जाती है। कलश को ब्रह्मांड और उसमें भरे जल को जीवन का प्रतीक माना जाता है। नारियल को शुभता और समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करके मां दुर्गा की आराधना करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

घट-स्थापना की परंपरा का धार्मिक महत्व

घट-स्थापना केवल एक धार्मिक विधि नहीं बल्कि शक्ति की उपासना का संकल्प भी मानी जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और सुख, शांति, समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। कलश स्थापना के साथ ही घर में नौ दिनों तक विशेष पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का आरंभ होता है। कई स्थानों पर घट-स्थापना के साथ मिट्टी के पात्र में जौ बोने की भी परंपरा है। इसे जौ बोना या जवारे उगाना कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान जौ का बढ़ना घर की सुख-समृद्धि और शुभता से जुड़ा संकेत माना जाता है।

कैसे की जाती है घट-स्थापना?

घट-स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके पवित्र किया जाता है। इसके बाद वहां मिट्टी या बालू की वेदी बनाई जाती है और उसमें जौ बोए जाते हैं। इसके ऊपर कलश स्थापित किया जाता है। कलश में स्वच्छ जल भरकर उसमें अक्षत, सुपारी, सिक्का और अन्य पूजा सामग्री रखी जाती है। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाए जाते हैं और उसके ऊपर नारियल रखा जाता है। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश और देवी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। कई परिवारों में अपनी परंपरा के अनुसार कलश स्थापना की विधि थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए परिवार की कुल परंपरा और स्थानीय मान्यताओं का भी ध्यान रखा जाता है।

घट-स्थापना में किन बातों का रखें ध्यान?

घट-स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करना विशेष माना जाता है। पूजा स्थल साफ और शांत होना चाहिए। कलश स्थापना से पहले सभी पूजा सामग्री को व्यवस्थित कर लेना अच्छा रहता है। कलश में स्वच्छ जल का प्रयोग करना चाहिए और नारियल तथा पत्तों को साफ करके ही स्थापित करना चाहिए। नवरात्रि के दौरान घर में सात्विक वातावरण बनाए रखने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत, पूजा, मंत्र जाप और आरती करते हैं। धार्मिक मान्यता में नवरात्रि के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

कलश और नारियल का क्या है महत्व?

कलश को शुभता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसमें भरा जल जीवन और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। कलश के ऊपर रखा नारियल भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। नारियल को भगवान को अर्पित करने की परंपरा में शुद्धता और समर्पण का भाव जुड़ा हुआ है। आम के पत्ते भी मंगल और जीवन शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।

नवरात्रि में घट-स्थापना का महत्व

घट-स्थापना हमें यह संदेश देती है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत श्रद्धा, शुद्धता और सकारात्मक संकल्प के साथ करनी चाहिए। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से भक्त अपने भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करते हैं। नौ दिनों की साधना आत्मविश्वास, भक्ति और अनुशासन से जुड़ने का अवसर देती है। इस प्रकार शारदीय नवरात्रि में घट-स्थापना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि देवी शक्ति के स्वागत, शुभ संकल्प और आध्यात्मिक साधना की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धा और विधि के साथ की गई कलश स्थापना के बाद भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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