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Ashwin Guru Pradosh Vrat: आश्विन गुरु प्रदोष व्रत पर करें इस कथा का पाठ, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगे संकट

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ashwin Guru Pradosh Vrat: आश्विन मास का गुरु प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11:16 बजे शुरू होगी और 8 अक्टूबर की रात 10:15 बजे समाप्त होगी। 

Ashwin Guru Pradosh Vrat
Ashwin Guru Pradosh Vrat: आश्विन मास का गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन त्रयोदशी तिथि पर व्रत रखने के साथ शिव-पार्वती की पूजा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करने की धार्मिक मान्यता है। क्या आपको पता है कि प्रदोष व्रत की कथा में भगवान शिव किस तरह अपने भक्त के संकट दूर करते हैं? आइए जानते हैं इस कथा के बारे में...

कब है गुरु प्रदोष व्रत

आश्विन मास का गुरु प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11:16 बजे शुरू होगी और 8 अक्टूबर की रात 10:15 बजे समाप्त होगी। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करने का विशेष महत्व माना जाता है। दिल्ली में पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा। 

प्रदोष व्रत की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी और पुत्र के साथ रहता था। वह भगवान शिव का भक्त था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। जीवन में लगातार परेशानियां बनी रहती थीं। इसके बावजूद ब्राह्मण भगवान शिव की पूजा करता और उनके प्रति अपनी श्रद्धा बनाए रखता था। एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने प्रदोष व्रत रखने का संकल्प लिया। उसने पूरे विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। परिवार ने भी भगवान शिव से अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना की।

भक्त ने रखा प्रदोष व्रत

कथा के अनुसार ब्राह्मण परिवार भगवान शिव की भक्ति में लगा रहता था। प्रदोष के दिन उन्होंने स्नान करके व्रत रखा और शाम के समय भगवान शिव का पूजन किया। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए गए। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए प्रदोष व्रत की कथा सुनी गई। कहा जाता है कि भगवान शिव अपने भक्त की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न हुए। उन्होंने उसके जीवन में चल रही परेशानियों को दूर करने और परिवार को सुख-शांति प्रदान करने का आशीर्वाद दिया।

शिव कृपा से दूर हुए संकट

प्रदोष व्रत की कथा में भगवान शिव को संकटों का नाश करने वाला बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम के साथ प्रदोष व्रत करता है और भगवान शिव की कथा सुनता या पढ़ता है, उसे शिव कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ गुरु ग्रह से जुड़े दोषों और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना भी की जाती है।

इस तरह करें कथा का पाठ

गुरु प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करें। संभव हो तो व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। कथा पूरी होने के बाद भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में शिव पूजा और कथा श्रवण का विशेष महत्व माना जाता है।

शिव मंत्र का करें जाप

पूजा और कथा के दौरान भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं। माना जाता है कि शिव नाम का स्मरण मन को एकाग्र करने और भगवान शिव के प्रति भक्ति भाव बढ़ाने में सहायक होता है।

कथा सुनने का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत की कथा सुनने और पढ़ने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। जो भक्त श्रद्धा से व्रत रखते हैं और प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करते हैं, उनके जीवन से संकट दूर होने और सुख-शांति आने की कामना की जाती है। इसी वजह से गुरु प्रदोष के दिन व्रत के साथ कथा पाठ को भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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